जिले में बेलगाम होकर दौड़ रहे स्कूली वाहनों के लिए न कोई नियम और न ही आला अधिकारियों के आदेश मायने रखते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के आदेशों के बावजूद अभी तक जिले के 50 फीसदी स्कूलों ने बसों की रिपोर्ट नहीं दी।
हालात यह है नोटिस पर नोटिस दिए जाने के बावजूद स्कूल संचालक चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले में लगभग 600 स्कूल बस आरटीए विभाग से पंजीकृत है। परिवहन विभाग की ओर से कुछ दिन पहले आदेश दिए गए थे कि इन बसों में सीसीटीवी कैमरों की रिपोर्ट 7 फरवरी तक सौंप दी जाए।
सभी स्कूल संचालकों को बसों की फिटनेस से लेकर उसमें लगे सीसीटीवी कैमरों की रिपोर्ट विभाग मेें जमा करनी थी। अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी अभी तक महज 300 स्कूलों ने ही रिपोर्ट जमा की है।
बटोरी सुर्खियां, फिर पीछे हट गए सामाजिक संगठन
स्कूल बसों को नियमानुसार चलवाने के लिए कुछ दिन पहले कई समाजिक संगठन भी सामने आए थे। बाकायदा रास्ते में जगह-जगह पुलिस के साथ मिलकर चेकिंग अभियान भी चलाया गया था। हालांकि सुर्खियां बटोरने के बाद अब न कोई संगठन सामने आ रहा और न ही पुलिस का इस तरफ ध्यान जा रहा है।
बोलीं डीईओ, यह आरटीए का काम
डीईओ सत्यवती नांदल का कहना है कि स्कूल बसों की देखरेख का कार्य शिक्षा विभाग का नहीं है। यह काम आरटीए के अंतर्गत आता है। यदि आरटीए की तरफ से उन्हें रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले स्कूलों की लिस्ट दी जाती है तो वह अपने स्तर से स्कूलों से सवाल-जवाब करेंगे।