रोहतक। शारीरिक चुनौतियों और सिस्टम की खामियों के बावजूद मजबूत इरादों के दम पर सविता रानी ने सफलता की नई कहानी लिखी है। सुपवा से डिग्री पूरी करने वाली वह पहली दिव्यांग व्हीलचेयर यूजर छात्रा बन गई हैं।
हिसार के मोहब्बतपुर गांव की रहने वाली सविता रानी का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा। मात्र 9 माह की उम्र में बुखार के इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगने से उनका शरीर लकवाग्रस्त हो गया जिससे हाथ और सिर को छोड़कर बाकी शरीर ने काम करना बंद कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना लक्ष्य बनाया।
सविता ने वर्ष 2007 में व्हीलचेयर पर रहते हुए फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई पूरी की लेकिन नौकरी के लिए किए गए उनके आवेदन बिना कारण बताए खारिज होते रहे। वर्ष 2020 में पीजी में प्रवेश के लिए आवेदन करने पर उन्हें पता चला कि उनकी डिस्टेंस डिग्री को मान्यता नहीं दी जा रही है।
इसके बाद भी सविता ने हिम्मत नहीं हारी और उसी वर्ष टेक्सटाइल डिजाइनिंग में स्नातक कोर्स में दोबारा दाखिला लेकर नई शुरुआत की। विश्वविद्यालय परिसर में रैंप की सुविधा न होने और कक्षाएं ऊपरी मंजिलों पर होने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। लिफ्ट भी अक्सर खराब रहती थी जिससे उनकी कक्षाएं छूट जाती थीं।
सविता ने इन समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए और लगातार प्रयास किए। उनके संघर्ष का ही परिणाम है कि आज सुपवा परिसर में दिव्यांगों के लिए रैंप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आज वह अपना स्टार्टअप चला रही हैं। अपने डिजाइन किए हुए उत्पादों को वह सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर में बेच रही हैं।