ई-टेंडरिंग के विरोध कर रहे सरपंच अब सांसदों और विधायकों से अपनी मांगों को लेकर समर्थन मांगेंगे। अगर समर्थन नहीं मिला तो गांवों में आने पर उनका विरोध करेंगे। बुधवार को रोहतक के सर्किट हाउस में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। साथ ही प्रदेश स्तरीय सरपंच एसोसिएशन का गठन किया गया, जिसमें रोहतक जिले के गांव सैमाण के सरपंच रणवीर सिंह को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया।
सरपंच यूनियन के प्रदेश सचिव विकास खत्री ने बताया कि बुधवार दोपहर प्रदेशभर सरपंचों की बैठक पूर्व आईजी रणवीर शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक के दौरान सरपंचों ने ई-टेंडरिंग को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का एलान किया। साथ ही तय किया कि अगर सांसद व विधायक आंदोलन में उनका साथ नहीं देंगे तो वे उनका भी विरोध करेंगे। इसके साथ ही सरकार को चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती तब तक बीडीपीओ कार्यालय को बंद करते हुए धरना प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।
सरपंच एसोसिएशन की 25 सदस्यीय प्रदेशस्तरीय कार्यकारिणी गठित
बैठक के दौरान सरपंच एसोसिएशन की तरफ से प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें 25 सरपंचों को शामिल किया गया। इस कमेटी में हर जिले से सरपंचों को शामिल किया गया है। साथ ही कमेटी में शामिल सरपंचों में से ही पदाधिकारियों को चुना गया, जिसमें पूर्व आईजी रणवीर शर्मा को संरक्षक, रणवीर सिंह सैमाण को प्रदेशाध्यक्ष, संतोष बेनीवाल को उपप्रधान, ईशम सिंह महासचिव, विकास खत्री सचिव, चुन्नीलाल कोषाध्यक्ष, चंद्रमोहन पोटलिया प्रवक्ता, आरिफ हथौड़ी सह प्रवक्ता नियुक्त किए गए हैं। साथ ही पांच जोन में उपाध्यक्ष बनाए गए, जिसमें रमेश, सोनू डाकला, प्रवीण महेंद्रगढ़, संदीप राणा, नीटू मलिक मोखरा शामिल हैं। इसके साथ ही दलवीर सिंह, सुभाष, अजीत सिंह, राजेश जागलान, राकेश, आशीष कालवास, सुधीर, मुकेश शर्मा, मनोज, सूर्यपाल, प्रवीण रेवाड़ी, संजय दूहन, रामचंद्र श्योराण को सदस्य बनाया गया है।
ई-टेंडरिंग को तुरंत वापस ले सरकार : रणवीर सिंह
सरपंच एसोसिएशन के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष रणवीर सिंह ने कहा कि सरकार ई-टेंडरिंग को तुरंत प्रभाव से वापस लें। 73वें संशोधन की 11वीं सूची के 29 अधिकार व बजट पंचायत को सीधे दिए जाएं। इसको लेकर सांसद व विधायकों को भी साथ आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक ब्लॉक स्तर पर तालाबंदी जारी रहेगी। साथ ही सरपंचों के असहयोग आंदोलन के चलते कोई प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजा जाएगा।