रोहतक। पंडित बीडी शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला संस्थान में अनुबंध आधारित सेवा मुहैया कराने वाले बियरर, डाटा ऑपरेटर व अन्य कर्मचारियों की वेतन काटौती व ड्यूटी में गोलमाल से जुड़ा है। यह घोटाला 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जा रहा है।
कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) के कुलपति डाॅ. एचके अग्रवाल को शिकायत देकर संस्थान में सेवाएं दे रही एपी सिक्योरिटी कंपनी के खिलाफ आरोप लगाए हैं। कुलपति ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। जांच विवि के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) डॉ. कुंदन मित्तल को सौंपी गई है। उन्हें जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। साथ ही यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंच गया है।
कुलपति को दी गई शिकायत में कहा गया है कि एचकेआरएन (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) के बावजूद पीजीआईएमएस में बियरर, डाटा एंट्री ऑपरेटर व अन्य कार्य निजी कंपनी को सौंपा गया है। संस्थान में ऐसे करीब एक हजार से अधिक कर्मचारी हैं। आरोप है कि कंपनी में ठेकेदार व संस्थान के कुछ अधिकारियों के परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों को भी नियुक्त किया गया है। इनमें से कुछ तो बिना ड्यूटी ही वेतन ले रहे हैं।
यही नहीं, अनुबंधित कर्मचारियों के हाजिरी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई है। एमओयू की शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है। कंपनी पर कर्मचारियों को गलत तरीके से अनुपस्थित चिह्नित कर मनमाने ढंग से वेतन काटने का भी आरोप लगाया गया है।
कुलपति से की गई इस शिकायत की जांच सीवीओ को सौंपी गई है। सीवीओ ने शिकायतकर्ता व फर्म के प्रतिनिधियों से बातचीत कर तथ्य जुटाने का प्रयास किया है। कहा है बैंक लेनदेन व ड्यूटी रोस्टर की भी जांच की जाएगी। सीवीओ जल्द ही इस मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
कंपनी का तर्क-आरोप आधारहीन, नहीं हुआ नियमों का उल्लंघन
एपी सिक्योरिटी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक संदीप कौशिक ने कहा है कि आरोप आधारहीन हैं। एमओयू की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया गया है। पिछले आउटसोर्स कर्मचारियों को बरकरार रखने के साथ किसी का वेतन नहीं काटा गया है। कंपनी ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। शिकायतकर्ताओं को कुछ दिन पहले नौकरी से निकाला जा चुका है।
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-निजी सुरक्षा कंपनी की एक शिकायत मिली है। इसकी जांच कराई जा रही है। सीवीओ को यह जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-डाॅ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय।