नोटबंदी के 21वें दिन भी बैंक, एटीएम और डाकघरों में कतारें कम नहीं हुईं। घंटों लाइन में खड़े रहे लोग नकदी के लिए लाचार दिखे। बैंकों में कैश कम आने की वजह से किसी को भी जरूरत भर का पैसा नहीं मिल रहा है। किसी को बच्चे की फीस भरनी है तो किसी को मकान का किराया देना है। किसी को दवा लेनी है तो किसी को रोज के खर्चे के लिए पैसे चाहिए। लेकिन बैंक से नकदी नहीं मिलने की वजह से सभी के काम अटक गए हैं। कई अभिभावक तो इसलिए परेशान हैं कि यदि 30 नवंबर तक बच्चों की फीस नहीं जमा की तो स्कूल बच्चों का नाम काट देगा। यदि नाम नहीं भी कटा तो फाइन तो भरनी ही पड़ेगी।
बैंकों और डाकघरों में कैश नहीं है और एटीएम बंद हैं। इस वजह से लोग अपने जरूरी काम छोड़कर दिनभर यहां-वहां भटकने और बैंक में धक्के खाने को मजबूर हैं। पैसे मिलेंगे, इस उम्मीद में लोग बैंक खुलने से पहले ही लाइनों में लग जाते हैं। बैंक खुलने पर धक्कामुक्की करके अंदर जाते हैं और दो घंटे बाद ही कैश खत्म होने का एलान कर दिया जाता है। आलम यह है कि लोग अपना सुख-चैन त्याग कर रात में भी एटीएम के बाहर लाइनों में पैसा निकालने के लिए खड़े नजर आते हैं। गृहणी भी घर का खर्च चलाने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। छोटे दुकानदार उधारी के सहारे जी रहे हैं।
मंगलवार दोपहर 12 बजे ही बैंक खाली हो गए। एक ओर लोग एटीएम और बैंकों के सामने कतारों का हिस्सा बन रहे हैं, तो दूसरी ओर बैंक अधिकारी कैश नहीं होने का रोना रो रहे हैं। शहर के अधिकतर एटीएम में ताले लटके हैं। जो एटीएम खुले हैं, उनमें कैश नहीं है का बोर्ड लगा है। बैंकों में टोकन लेने के लिए लोगों को मारामारी करनी पड़ रही है। एसबीआई की मुख्य शाखा के अलावा स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, इंडियन बैंक, एचडीएफसी बैंक आदि में सुबह बैंक में घुसने के लिए लोगों ने काफी जद्दोजहद की। बैंक कर्मचारियों को गेट बंद करना पड़ा और एक-एक करके लोगों को अंदर भेजा गया।
...तुम कैश दिलवा दो, मैं बटवा दूंगा
...तुम कैश दिलवा दो, मैं बटवा दूंगा। यह कहना था प्रधान डाकघर के प्रवर डाक पाल एसके मान का। डाकघर के अधिकारी कैश लेने के लिए सुबह से परेशान हैं। एसबीआई से कैश नहीं मिल रहा है। इस कारण वे लोगों की मदद करने में असमर्थ हैं।
डिमांड के मुताबिक नहीं मिलता कैश
सरकुलर रोड की स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की शाखा के प्रबंधक ने बताया कि पहले जितना कैश आता था, अब उससे कम आने लगा है। इस कारण एक से डेढ़ घंटे में ही कैश खत्म हो रहा है। पीछे से ही पैसों की सप्लाई कम है और डिमांड बढ़ती जा रही है। इस वजह से मुश्किल हो रही है।
घर खर्च चलाने को पैसे नहीं
जवाहर नगर की सुनीता ने बताया कि वह दो दिन से डाकघर आ रही हैं, लेकिन कैश नहीं होने के कारण खाली हाथ वापस जाना पड़ता है। घर का खर्च चलाने के लिए पैसे नहीं हैं।
चाहिए थे 24 और मिले 6 हजार
सावित्री ने बताया कि वह सुबह 9 बजे प्रधान डाकघर आई थीं। उन्हें 24 हजार रुपये की जरूरत थी, जबकि केवल छह हजार ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि मैं बीमार हूं फिर भी कतार में खड़ी हुई।
आते हैं, बिना टोकन लिए जाते हैं
योगी विजय श्योराण ने बताया कि वे रोज बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बाद भी टोकन नहीं मिल पा रहा है। सरकार को बुजुर्गों और महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था करनी चाहिए।
चहेतों को फायदा पहुंचाने का आरोप
सीमा ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मी खेल कर रहे हैं। वे अपने चहेतों को फायदा पहुंचना चाहते हैं। इस वजह से आम आदमी को पैसा नहीं मिल पा रहा है। मुझे दस हजार रुपये चाहिए थे, जबकि केवल 2 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
नहीं मिली पेंशन
पेंशन धारक कश्मीरी लाल पेंशन निकालने आए थे, लेकिन बैंक में कैश नहीं था। उनका कहना था कि वह कई दिनों से बैंक में पेंशन लेने के लिए आ रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
चार दिन से आ रहे बैंक
आईसीआईसीआई बैंक के सामने लेटे जितेंद्र ने बताया कि वह चार दिनों से बैंक आ रहे हैं, लेकिन बैंककर्मी कैश नहीं होने का राग अलाप रहे हैं।
मॉडल टाउन शाखा में सवा 12 बजे कैश खत्म
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मॉडल टाउन शाखा में मंगलवार दोपहर 12:15 बजे कैश खत्म हो गया। बैंक के एटीएम में भी रुपये नहीं थे। लोगों ने आरोप लगाया कि बैंक में पासबुक इंट्री का काम भी नहीं हो रहा है। इस वजह से उन्हें दिक्कतें आ रही हैं। बैंक मैनेजर ने कहा कि आरबीआई से पैसे की मांग की गई है। जब तक कैश नहीं आ जाता है, तब तक कुछ नहीं कर सकते। फिलहाल बैंक में सिर्फ पैसे जमा होने का काम चल रहा है।