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मिनी जू में पहली बार दिखी रॉयल बंगाल टाइगर छोटी सी 'आशा'

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वीरवार को मिनी जू में दिखी रॉयल बंगाल टाइगर आशा । संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। वीरवार को खुली धूप निकली और बारिश के बाद मौसम ने मिजाज बदला तो जू में पर्यटकों को चार साल बाद पहली बाद बंगाल टाइगर्स की अठखेलियां देखने को मिली। शहर के मिनी जू में 25 दिन पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आया रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा आशा और सागर दर्शकों से रूबरू हुए। वीरवार को चिड़ियाघर का नजारा बदला-बदला नजर आया, यहां आम दिनों की बजाय पशु-पक्षी प्रेमियों की ज्यादा भीड़ रही। बता दें कि टाइगर जोड़े को सेंट्रल जू अथॉरिटी के निर्देशानुसार तीन सप्ताह के लिए नजरबंद किया गया था।
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बिलासपुर जू से आने के बाद पहले दिन दोनों टाइगर्स का गुस्सा जहां सातवें आसमान पर था, वहीं 25वें दिन आशा और सागर को एक-एक करके बाड़े में खुला छोड़ा गया तो दर्शकों को देखते ही दोनों पानी में नहाते, पेड़ों पर चढ़ने की कोशिश करते नजर आए। पिंजरे में बने जंगल से माहौल में टाइगर अटखेलियां करते दिखे। डॉक्टरों ने मौसम में घुला ठंडापन भी उनकी मस्ती की वजह बताया। रोहतक जू में फिलहाल बदलाव की बयार चल रही है। इसे आकर्षक बनाने के लिए नए पक्षियों के पिजरों के निर्माण से लेकर अनोखी प्रजाति के पशु-पक्षियों को यहां लाया जा रहा है।
सौरभ 10 साल बना रहा रोहतक जू की शान
रोहतक के मिनी जू चार साल पहले तक सौरभ की दहाड़ से गूंज रहा था। वह जू में 22 साल की उम्र तक रहा। बुढ़ापे व बीमारी के कारण 9 मार्च 2015 को उसने आखिरी सांसे ली थी। सौरभ 10 साल तक चिड़ियाघर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। अब चार साल बाद मिनी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर्स की दहाड़ सुनाई देगी।
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दोनों की खुराक है 20 किलो मीट
5 साल के सागर और आशा दोनों की ही खुराक दिन का 20 किलो मीट है। इन्हें डाक्टरों की सलाह पर ही 10-10 किलो मीट खाने में दिया जाता है। मांसाहारी पशुओं को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशों के अनुसार सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखवाया जाता है। उनकी पाचन शक्ति ठीक रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
दोनों की रॉयल टाइगर 25 दिन की अवधि में नए माहौल में सहज हो चुके हैं। धीरे-धीरे इन्हें लोगाें के सामने लाया जाएगा। पहले दिन दोनों ने ही लोगाें को देखकर अच्छा रिस्पांस दिया है।
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- यशपाल जांगड़ा, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी।
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