पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की 2002 में हुई हत्या के मामले में भी अदालत ने राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी किया।
शुरुआती वर्षों में सुरक्षा कारणों से राम रहीम की अर्जियां खारिज होती रहीं, लेकिन 2020 के बाद से उन्हें नियमित अंतराल पर जेल से बाहर आने की छूट मिलने लगी थी।
बीमार मां से मिलने की अनुमति
2020 और 2021 में आपातकालीन आधार पर कुछ घंटों और एक दिन की पैरोल दी गई। इसके बाद 2022 और 2023 के दौरान मिली अधिकतर पैरोल और फरलो की अवधि उन्होंने उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम में बिताई, जहां से वे ऑनलाइन सत्संग और संगीत वीडियो जारी करते रहे। 27 मई 2024 को मिली एक महीने की पैरोल के दौरान उन्हें सिरसा डेरे में रहने की अनुमति मिली।