हरियाणा के रोहतक में बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थियों का संघर्ष शुक्रवार को 47वें दिन भी जारी रहा। निदेशक कार्यालय के बाहर अनशनरत विद्यार्थियों को नए विद्यार्थियों का भी समर्थन मिला। संस्थान में पहले ही दिन कक्षा का बहिष्कार कर नए विद्यार्थी भी आंदोलन में शामिल हो गए।
इस संबंध में निदेशक को पत्र लिखकर सूचित कर दिया गया है। साथ ही विद्यार्थियों ने सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने के साथ बॉन्ड पॉलिसी वापस लेने की अपील की है। ऐसा न होने पर आंदोलन तेज करने की भी चेतावनी दी है।
शुक्रवार को एमबीबीएस के नए विद्यार्थी पहली बार कक्षा के लिए संस्थान पहुंचे। यहां कक्षा का बहिष्कार करते हुए बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में आंदोलनरत विद्यार्थियों के साथ संघर्ष में शामिल हो गए। नए विद्यार्थियों ने निदेशक को अपने आंदोलन में शामिल होने की लिखित सूचना देने के साथ अनशन स्थल पर मीडिया को भी इस बारे में अवगत कराया।
विद्यार्थियों ने साफ कहा कि सरकार बॉन्ड पॉलिसी तुरंत वापस ले। यह न विद्यार्थी हित में है न स्वास्थ्य सेवाओं के। उन्होंने कहा कि दर्जी व मोची के बच्चे बड़ी मुश्किल से नीट में रैंक लेकर एमबीबीएस में प्रवेश लेने में सफल हुए हैं। उनका भी सपना डॉक्टर बनने का है।
बचपन से इसी सपने के साथ बड़े हुए हैं। अब सरकार की 40 लाख रुपये की बॉन्ड पॉलिसी उनके इस सपने को चकनाचूर कर रही है। पिछड़े व मध्यम वर्गीय परिवारों के ये बच्चे इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ हैं। इसलिए सरकार उनकी आवाज व अपील सुने और जनहित में फैसला ले।
इधर, पहले से आंदोलनरत विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार से 30 नवंबर को बातचीत हुई थी। इसके बाद से अब तक इस संबंध में कोई पत्र या नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। इसमें सरकार से हुई बातचीत व शर्तों की स्थिति स्पष्ट होगी। इसी के आधार पर विद्यार्थी अपना आंदोलन जारी रखने या कक्षाओं में जाने का फैसला लेंगे।
सरकार इस मामले में ढील बरत रही है। इस कारण विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बैच 2020 के विद्यार्थियों ने इसी कारण अपनी परीक्षा देने में असमर्थता जताते हुए निदेशक को अपील भेज दी है।
इसकी वजह आंदोलन के चलते कक्षाओं नहीं लगने, पढ़ाई न होने, सिलेबस पूरा न होने के अलावा हाजिरी कम होना है। ऐसे में सरकार विचार करे। आंदोलन इसी तरह चलता रहा तो पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी। उस परिस्थिति में विद्यार्थी बड़ा कदम उठाने को विवश हो सकते हैं।