रोडवेज बस में दो बहनों से कथित छेड़छाड़ का मामला उलझता जा रहा है।
लिस की ओर से पेश की गई चार्जशीट भी लगातार सवालों में घिर रही है। यदि चालान पर गौर किया जाए तो यह मामला अभी न तो लड़कों का पीछा छोड़ने वाला है और न ही लड़कियों का।
पुलिस ने चालान में लिखा है कि दोनोें बहनें वारदात के समय दिये गए बयानों पर अडिग हैं। इसके चलते छेड़छाड़ और मारपीट की धाराओं में चालान पेश किया गया है।
अब एक बात तो साफ हो गई है कि पुलिस ने अपनी जांच में तीनों लड़कों को छेड़छाड़ और मारपीट का आरोपी मान लिया है। चर्चा ये भी है कि स्थानीय पुलिस ने चालान में से स्टेट क्राइम की जांच रिपोर्ट हटा दी।
जबकि सीएम के आदेशों पर क्राइम ब्रांच को जांच सौपी गई थी। चालान में आईपीसी की धारा 354 ए (छूकर छेड़छाड़ करना), 323(मारपीट) के तहत तीनों युवक ों को आरोपी बनाया है।
अजीब तरह से उलझ गया केस
छेड़छाड़ का मामला अजीब तरह से उलझ गया है। एक तरफ जहां पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है वहीं आरोपी पक्ष की ओर से भी पुलिस कार्रवाई पर उंगली उठाई जा रही है। इतना ही नहीं केस में स्टेट क्राइम ब्रांच की भूमिका भी संदेह में है। मामले में गवाही से बचने के लिए स्टेट क्राइम की रिपोर्ट को चालान में पेश नहीं किया गया है।
चार गवाहों के शपथ पत्र संदेहास्पद
पुलिस ने दोनों बहनों के बयानों पर चालान तो दाखिल कर दिया, लेकिन चार गवाहों को संदेहास्पद माना है। इनमें आरोपी पक्ष के विमला, बिमला, समा कौर और संतोष शामिल हैं। चारों गवाहों के शपथ पत्रों को संदेहास्पद बताया है।
164 के बयानों में छेड़खानी का जिक्र नहीं
पुलिस ने मामले में अपना पीछा छुड़ाने के लिए तीनों युवकों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। जबकि बहनों के प्रथम एप्लीकेशन और 164 के बयानों में छेड़खानी का कोई बयान नहीं है। खुद माना था कि सीट को लेकर झगड़ा हुआ था। चालान पेश करने की बजाय एफआईआर कैंसिल करने की एप्लीकेशन लगानी चाहिए थी।
संदीप राठी आरोपी पक्ष के वकील।
हाईकोर्ट में करेंगे अपील
बहनों ने बयान में जिस शब्द का प्रयोग किया वह है, वह छेड़छाड़ की श्रेणी में ही आता है। इनके बयान को बस परिचालक का बयान भी सहयोग करता है। इसलिए दोनों बहनों के पक्ष में केस जाता है। आरती के 164 के बयान में लिखा है कि हमें चलती बस से धकेलकर नीचे गिरा दिया। पुलिस को हत्या प्रयास की धारा लगानी चाहिए थी। अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
अतर सिंह पंवार, पीड़ित पक्ष के वकील।
एक्सपर्ट व्यू: पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट कोर्ट में मजबूत सबूत नहीं
पॉलीग्राफ टेस्ट किसी मामले में निश्चित तौर पर मायने रखता है। इसके आधार पर किसी भी जांच एजेंसी को केस के निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिलती है। लेकिन टेस्ट रिपोर्ट को कोर्ट में एक मजबूत सबूत नहीं माना जाता है।
एडवोकेट डॉ दीपक भारद्वाज
पर केस चलेगा
- दोनों पक्षों के वकील से बातचीत, एक्सपर्ट व्यू
- बहनों से बातचीत-