अव्यवस्थाओं के कारण नगर निगम की पहरावर गौशाला में गौवंश की तड़प-तड़पकर मौत हो रही है, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को सबकुछ ठीक नजर आ रहा है। बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा के साथ पार्षद सूरजमल रोज, अनिल कुमार, बलराज उर्फ बल्लू, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू के पति बिजेंद्र हुड्डा ने गौशाला का निरीक्षण किया तो हालात पहले जैसे मिले, लेकिन निगम अधिकारियों ने उनके सामने देखरेख अच्छी होने से लेकर सफाई व्यवस्था, चिकित्सा तक को बेहतर बताया।
हालांकि, ज्वाइंट कमिश्नर और पार्षद अधिकारियों की बातों से संतुष्ट नहीं दिखे और हालात सुधारने के आदेश दिए। ज्वाइंट कमिश्नर ने गौशाला पर किये गए खर्च का ब्यौरा मांगा है। लापरवाह अधिकारियों से जवाब तलब किया है। वहीं, ज्वाइंट कमिश्नर के सामने ही निगम के अधिकारियों को ग्रामीणों ने खूब खरी-खोटी सुनाई और हंगामा किया। अमन, पवन, सचिन ने आरोप लगाया कि निगम के कर्मचारी गौशाला से अक्सर गायब रहते हैं। ग्रामीण गौवंश को परेशान देखकर मदद करने आते हैं तो भगा दिया जाता है।
नगर निगम की ओर से पहरावर में नौ माह पहले गौशाला बनाई गई, लेकिन व्यवस्था आज तक नहीं सुधर सकी है, जबकि उस पर हर महीने 14 लाख रुपये खर्च किये जाते हैं। गौशाला शुरू करते समय वहां 900 गौवंश रखे गये थे, जिसमें से पिछले दो माह में तीन दिन पहले तक 135 गौवंश की मौत हो चुकी थी। 100 से अधिक गौवंश की हालत खराब है। चारों ओर से टिन से कवर करके गौशाला शुरू तो कर दी गई, लेकिन उसकी अभी तक दीवाल नहीं बन पाई। उस समय टिन शेड लगाने का काम शुरू किया गया था, जिसमें से केवल एक बन सका है। गौशाला में निगम की ओर से 18 कर्मचारी तैनात हैं, जिनको डीसी रेट से वेतन दिया जाता है। पशुओं की सेहत की जांच के लिए दो डाक्टर तैनात हैं। चारे के लिए हर माह 9 लाख रुपये दिए जाते हैं। कर्मचारियों के वेतन, पानी के लिए अलग से खर्च दिया जाता है। इसके बावजूद गौशाला में गौवंश को बिना कटा चारा खिलाया जाता है, वह भी गंदगी में उनके बीच फेंक दिया जाता है। गौवंश जमीन पर तपती रेत की वजह से पूरा दिन बैठ भी नहीं पाते हैं। गौशाला में चारों ओर कवर करने के लिए लगाई गई टिन के नीचे से कुत्ते आ जाते हैं और गौवंश पर हमला करते हैं।
गौशाला का ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा ने तीन दिन पहले निरीक्षण करके हालात पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद देखरेख में लगे अधिकारी हरकत में आये। फिर से निरीक्षण करने के लिए बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर और पार्षद फिर गौशाला पहुंचे। इनके साथ नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद थे। ज्वाइंट कमिश्नर और पार्षदों ने अधिकारियों से गौशाला में अव्यवस्थाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने झूठ बोलना शुरू कर दिया। कहा कि गौशाला में सबकुछ ठीक है। बीमारी के कारण पशु मर रहे हैं। जबकि मौके पर ही कई अन्य गौवंश मरणासन्न हालत में थे। अखिल भारतीय गौशाला के प्रधान नरेश और महासचिव भोलाराम को मौके पर बुलाकर वार्ता की गई। पशुओं की वीडियोग्राफ ी कराकर निर्माण कार्य पूरा होने तक अखिल गौशाला में शिफ्ट करने पर विचार किया गया।
लापरवाह अधिकारियों को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
ज्वाइंट कमिश्नर ने बताया कि गौशाला की हालत देखते हुए उसकी देखरेख करने वाले अधिकारियों को नोटिस दिया गया है। एमई, एक्सईएन, ईओ, सीएसआई को नोटिस देकर खर्च का ब्यौरा मांगा गया है। उनसे गौशाला के हालात पर जवाब तलब किया गया है, जो उनको तीन दिन में देना होगा। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आज डीसी से मिलेंगे मेयर और पार्षद
पहरावर में नगर निगम की गौशाला में जिस तरह अव्यवस्था फैली है और गौवंश मर रहे हैं, उसको देखते हुए मेयर रेणू डाबला के अलावा अन्य पार्षद बृहस्पतिवार को डीसी से मिलने की बात कह रहे हैं। वह डीसी के सामने प्रस्ताव रखेंगे, जिससे गौवंश को गौशाला का निर्माण होने तक अखिल भारतीय गौशाला में शिफ्ट किया जा सके और उनको सरकार की ओर से चारे के लिए रुपया दिया जा सके।