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विधायक साहब ये कैसा दरबार

Wed, 25 May 2016 02:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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मेयर के घर के सामने विधायक का जनता दरबार, मेयर को पता न जनता को - फोटो : demo pic
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जनता की समस्याओं को सुनने के लिए विधायक मनीष ग्रोवर ने एक बार फिर से जनता दरबार लगाना शुरू कर दिया है। कई महीने बाद मंगलवार को शहर के अति पिछड़े इलाके खोखराकोट में मेयर रेनू डाबला के घर के बाहर दरबार लगाया गया। खास बात यह रही कि इस दरबार के बारे में न तो जनता को पता और न ही मेयर को। मेयर के घर के बाहर दरबार लगाया गया और मेयर को नहीं बुलाया गया। आम जनता को भी इस दरबार के बारे में मीडिया के माध्यम से कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। विधायक ने दरबार में केवल भाषण दिया और राज्यपाल के कार्यक्रम में पहुंचने की मजबूरी बताकर चले गए। बाद में दूसरे स्थानीय नेता और अफसरों ने जनता की शिकायत सुनी। अब सवाल है कि ऐसे दरबार में जनता की कितनी समस्याओं का समाधान होगा। भड़कीं मेयर ने कहा कि इससे शर्मनाक क्या होगा।  
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दरबार में समस्याएं नहीं सुनी, केवल अपनी बात सुनाई

दरबार में विधायक मनीष ग्रोवर पहुंचे और सरकार की उपलब्धियां गिनानी शुरू कर दी। विधायक ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और कहा कि लगातार 15 साल कांग्रेस का विधायक रहा, लेकिन विकास नहीं कराया गया। भाषण देने के बाद विधायक यह कहते हुए चले गए कि उनको राज्यपाल के कार्यक्रम में जाना है, जहां प्रोटोकॉल के तहत उनका होना जरूरी है। विधायक के जाते ही स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को घेर लिया और उनके सामने समस्याओं की लाइन लगा दी। जिससे हंगामा खड़ा हो गया और जैसे-तैसे अधिकारी और दूसरे स्थानीय नेता आश्वासन देकर लौट आए।  

बिना पूर्व सूचना के क्यों लगाया दरबार

विधायक ने कई महीने पहले जनता दरबार शुरू किया था। जिसमें वे मोहल्लों में जाकर लोगों की समस्या सुनते। लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया था कि उनमें पार्षदों को नहीं बुलाया जाता। इसके बाद पार्षदों को बुलाना शुरू कर दिया गया। लेकिन जनता कॉलोनी में लगे दरबार में विधायक के समर्थकों और वैश्य एजुकेशन सोसाइटी से निकाले गए कर्मचारियों के बीच हुई मारपीट के बाद दरबार लगाने बंद कर दिए गए। अब फिर से विधायक का जनता दरबार शुरू हुआ। मंगलवार को खोखराकोट में वहां की पार्षद और मेयर को ही नहीं बुलाया गया। जबकि नगर निगम, पब्लिक हेल्थ और बिजली निगम तक के अधिकारी वहां मौजूद रहे। सवाल है कि जनता और उनके पार्षद प्रतिनिधियों को खुलकर दरबार की सूचना क्यों नहीं दी जा रही। क्या विधायक नहीं चाहते कि दरबार में ज्यादा लोग आएं। क्या विधायक दरबार में मीडिया को नहीं आने देना चाहते। क्या पार्षदों को जनता और सरकार के बीच से हटाया जा रहा है। सवाल कई हैं। लेकिन दरबार से शहर में चर्चाओं का राग दरबार जरूर शुरू हो गया है।
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मेरे वार्ड में घर के पास ही जनता दरबार लगाया जा रहा है। मुझे बुलाना तो दूर की बात है, बताया तक नहीं गया। जबकि नगर निगम के अधिकारियों को इसमें बुलाया गया है। यह पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष भावना के तहत किया जा रहा है। इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है। शहर व अपने वार्ड की समस्याओं के बारे में मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता है।
रेनू डाबला, मेयर, नगर निगम, रोहतक।

मेयर हर विकास कार्य से भाग रही हैं। सात महीने में हाउस बोर्ड की बैठक तक नहीं की। उनसे जनता जवाब मांग रही है कि बतौर मेयर उन्होंने शहर के लिए क्या किया है?
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मनीष ग्रोवर, विधायक, रोहतक।
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