काला पीलिया जांचने के नाम पर एक निजी अस्पताल ने मरीज से सात हजार रुपये की वसूली कर ली। बुधवार को परिजनों ने जब बवाल किया तो डॉक्टर को जांच के नाम पर लिए गए रुपये लौटाने पड़े। इस संबंध में पीड़ितों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को शिकायत भेजी है।
करनाल के असंध स्थित गांव जयसिंह पुरा निवासी नरेंद्र ने बताया कि वह दिल्ली बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में जांच के लिए आया। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टर ने उसे गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के विशेषज्ञ को दिखाने को कहा। इसके बाद वह एक निजी अस्पताल में जांच के लिए गया। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे काला पीलिया की शिकायत बताई। इसके कीटाणु की जांच के लिए उससे सात हजार रुपये लिए और एक माह की दवा 13 हजार रुपये में उपलब्ध कराई। जब वह गांव गया तो उसके परिवार के वीरेंद्र ने बताया कि वह भी काला पीलिया का उपचार पीजीआईएमएस रोहतक से करा रहा है। उसने बताया कि काला पीलिया के कीटाणु की जांच निशुल्क होती है और पीजीआईएमएस जीवन रेखा योजना के तहत कम रुपये में दवा उपलब्ध होती है।
इस संबंध में जब उसका संपर्क हसन गढ़ की धर्मार्थ सेवा समिति से हुआ तो उन्होंने उसकी मदद की। समिति के प्रधान मनोज गर्ग, कैशियर आलोक कुमार और सदस्य विनोद कुमार नरेंद्र के साथ निजी अस्पताल गए। निजी अस्पताल में जाकर समिति सदस्यों की डॉक्टर के साथ झड़प हुई। समिति के सदस्याें ने बताया कि काला पीलिया की दवा देने वाली कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह जांच भी कराए, ऐसे में मरीज से जांच के नाम पर सात हजार रुपये क्यों लिए गए? दबाव बनता देख डॉक्टर ने पैसे लौटा दिए। इस संबंध में जब अस्पताल संचालक से फोन पर उनका पक्ष लेने के लिए संपर्क किया गया तो उनके सहायक ने बताया कि डॉक्टर बाहर हैं, उनसे संपर्क बृहस्पतिवार को हो सकेगा।
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जागरूकता का अभाव मरीजों को पहुंचा रहा नुकसान
काला पीलिया के उपचार के लिए सरकार ने जीवन रेखा योजना चालू की है। इसके तहत एससी व बीपीएल परिवार को निशुल्क उपचार मिलता है। जबकि सामान्य वर्ग को तीन माह के लिए 8,830 रुपये मासिक के हिसाब से दवा मिलती है। इसमें सभी जांच निशुल्क होती हैं। डॉक्टरों की मानें तो मरीज जिस कंपनी की दवा खाता है उसी कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि वह निशुल्क काला पीलिया के कीटाणु की जांच कराए। लेकिन निजी अस्पताल ऐसा नहीं करते हैं।
धर्मार्थ सेवा समिति हसन गढ़ मदद को मैदान में
धर्मार्थ सेवा समिति हसन गढ़ काला पीलिया के मरीजों की मदद के लिए कार्य कर रही है। समिति के प्रधान मनोज गर्ग ने बताया कि वे अब तक अपनी ओर से 15 मरीजों का उपचार करवा चुके हैं। पांच अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मुलाकात के बाद वे प्रदेश भर में जगह-जगह काला पीलिया की बीमारी के लिए स्क्रीनिंग कैंप लगा रहे हैं। उनका मकसद है कि काला पीलिया के रोगी झोलाछाप और गलत डॉक्टरों की अपेक्षा पीजीआईएमएस में सरकार की योजना के तहत सस्ता और निशुल्क उपचार प्राप्त करें।
बोले अधिकारी
काला पीलिया के उपचार के लिए सरकार की ओर से जीवन रेखा योजना चलाई जा रही है। इसके तहत सामान्य मरीज को सस्ता और एससी व बीपीएल को निशुल्क उपचार मिल रहा है। इस योजना के तहत पीजीआईएमएस में उपचार किया जा रहा है।
- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, नोडल अधिकारी, काला पीलिया, पीजीआईएमएस
हमने काला पीलिया की दवा के लिए कंपनी से 8,830 रुपये मासिक रेट पर एमओयू साइन कर रखा है। इसके अलावा चार जांच भी निशुल्क कराई जाती हैं। हर माह दवा स्वास्थ्य विभाग खरीद कर पीजीआईएमएस को सौंप देता है। इस दवा पर एमआरपी 25 हजार रुपये है।
- डॉ. कुलदीप, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग