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दंगे में जल गया व्यापार, अब चली गई जिंदगी

Thu, 02 Jun 2016 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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सुखपुरा चौक पर उपद्रवियों ने दंगे के दौरान जलाई थी दुकान - फोटो : amar ujala
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फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों ने कुछ लोगों को किस तरह जिंदगी भर ना भरने वाले जख्म दिए हैं, उसे सुखपुरा चौक के पास कनफैक्शनरी की दुकान पर उदास बैठे मनीष सैनी से बेहतर कोई नहीं बता सकता। मनीष की कनफैक्शनरी की दुकान को दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिया था। दुकान को मनीष के भाई सोनू चलाते थे। दंगा शांत हुआ तो दुकान ठीक करके जिंदगी सामान्य करने की तैयारी की, लेकिन दुकान का फर्नीचर ठीक कराते समय सोनू की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। सोनू की मौत के लिए परिवार सरकार से मुआवजे की आस लगाए है। इस संबंध में सीएम से बात की गई तो उन्होंने आश्वासन दिया है।
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सुखपुरा चौक पर रहने वाले सोनू सैनी की घर के पास ही सोनू कनफैक्शनरी के नाम से दुकान थी। इसी के सहारे परिवार का गुजारा चलता था। सोनू के परिवार में पत्नी रेखा, दो बेटे चार वर्षीय दीपांशु, एक साल के दीक्षित के अलावा भाई मनीष और नरेश हैं। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दंगाइयों ने कनफैक्शनरी को आग के हवाले कर दिया, जिसे बचाने के लिए सोनू सामने आए तो जान से मारने की धमकी दी गई। मजबूरन सोनू अपनी रोजी को जलते हुए देखते रहे। दंगों के बाद सरकार से मुआवजा मिला तो दुकान को फिर से शुरू करने के लिए फर्नीचर ठीक कराने लगे। दुकान में काम करवाते समय सोनू बिजली की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई। इस तरह परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पहले दंगे में दुकान जला दी गई, अब दंगे के कारण ही सोनू की जान चली गई।

मनीष बताते हैं कि आंदोलन के दौरान हुए दंगे ने उनके परिवार को ऐसा दर्द दिया है जो इस जिंदगी में नहीं भर सकता। दंगाइयों ने पहले दुकान छीन ली, फिर भाई की मौत की वजह भी दंगा ही बना। अगर उनकी दुकान को जलाया नहीं जाता तो भाई की जान भी नहीं जाती। दुख झेल रहे परिवार को सरकार से सोनू के करंट की चपेट में आकर मरने के बदले मुआवजे की आस है। सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलकर कुछ व्यापारियों ने परिवार के दर्द को बताया तो उन्होंने जल्द मुआवजे का आश्वासन दिया है।
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डर जरूर है, लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे

दंगे में अपनी दुकान और भाई की जिंदगी खो चुके मनीष कहते हैं कि फिर से आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इस बार ऐसा नहीं होने देंगे। प्रशासन भी सख्त दिखाई दे रहा है और व्यापारी अपनी सुरक्षा खुद भी करेंगे। इसके लिए व्यापारी एकजुट हैं। वह किसी भी अप्रिय घटना का मिलकर सामना करेंगे। कहा कि जितना बड़ा दर्द परिवार को पिछले दंगों ने दिया है, फिर से ऐसा दर्द झेलने की झमता परिवार के लोगों में नहीं है।
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