जेल भरो आंदोलन के चौथे दिन सरकार ने आंदोलनकारियों को बातचीत का न्यौता दे दिया। बृहस्पतिवार दोपहर तीन बजे आंदोलनकारियों की कोर कमेटी चंडीगढ़ में सरकार से वार्ता करेगी। वार्ता का बुलावा आते ही आंदोलनकारियों ने फिलहाल के लिए जेल भरो आंदोलन को टाल दिया है। हालांकि सेक्टर 1 स्थित जाट भवन में धरना जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि यहां जाटों को डीजीपी और गृह सचिव से मिलवाया जाएगा। बता दें कि आंदोलन के तीन दिन तक तीन दर्जन लोगों को गिरफ्तारियां की गईं। पीछे हट रही पुलिस को जाटों ने खूब छकाया और अड़कर गिरफ्तारियां दी। पुलिस ने सभी को हाथोंहाथ जमानत देकर घर-घर छुड़वाया। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। सूत्रों की मानें तो पुलिस आंदोलनकारियों को जेल नहीं भेजना चाहती है। डर है कि कहीं आंदोलनकारी अंदर बंद युवाओं के साथ मिलकर जेल में अनशन न शुरू कर दें।
आंदोलन के चौथे दिन बुधवार दोपहर आंदोलनकारी गिरफ्तारी देने के लिए जाट भवन में जुटे ही थे कि तहसीलदार गुलाब सिंह संदेश लेकर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि डीसी अतुल कुमार ने जिले में रोजाना हो रही गिरफ्तारियों के मामले में मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को जानकारी दे दी है। इसलिए वे उनकी मांगों पर बातचीत करना चाहते हैं। आंदोलनकारियों ने आधे घंटे मंथन के बाद जेल भरो आंदोलन को स्थगित कर दिया। जाट युवा एकता मंच के संयोजक सतीश राणा ने बताया कि चंडीगढ़ में वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार को 21 फरवरी के दिन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ द्वारा किया गया वादा याद दिलाया जाएगा। वादा किया गया था कि आंदोलन के दौरान हुए सभी केस खारिज कर दिए जाएंगे। किसी भी युवा को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। मंच का आरोप है कि अब तक सैकड़ों युवाओं को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किया जा चुका है। नवीन मलिक ने कहा कि वार्ता में मंच की ओर से एक एजेंडा रखा जाएगा, लेकिन तब तक जाट भवन के बाहर धरना जारी रहेगा। हल नही निकला तो फिर से आंदोलन होगा। युवाओं के जेल से बाहर आने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस अवसर पर विनीत धनखड़, ओमप्रकाश कबूलपुर, जगजीत हुड्डा, राम प्रकाश राठी, बिट्टू, संदीप नरवाल, अनूप, विकास हुड्डा, प्रेमलता खरैटी, कमला चुलाना, कृष्णा, शांति, खुजानी सांघी, अनीता खेड़ीसाध, लक्ष्मी किलोई और सावित्री मौजूद रहे।
इन एजेंडों पर होगी सरकार से बात
21 फरवरी को सरकार ने आंदोलन के केस खारिज करने का जो वादा किया था, उसका नोटिफिकेशन जारी किया जाए।
जब तक सरकार केस खारिज करने का नोटिफिकेशन जारी नही करती, तब तक नई गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाए। जेल में बंद युवाओं को जमानत दिलवाई जाए।
आरोप है कि आंदोलन के दौरान कई बेकसूर युवा सड़कों से उठाए गए और उन पर संगीन धाराएं लगाई गई हैं। जबकि ये युवा किसी निजी काम से शहर में आए हुए थे। उनके खिलाफ न तो कोई फोटो है ओर न ही कोई विडियो है। वो कहीं भी आगजनी में नहीं थे। उनके खिलाफ एफआईआर रद्द की जाए और उन्हें रिहा किया जाए।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए सभी आंदोलनकारियों के परिवारों को मुआवजा व एक सदस्य को तुरंत सरकारी नौकरी दी जाए।
दोबारा से शुरू कर देंगे जेल भरो आंदोलन
मंच के सलाहकार जुगनू बोहर ने बताया कि सरकार से बातचीत के बाद वे गांव-गांव जाकर लोगों को बताएंगे कि क्या बातचीत हुई है। सरकार ने उनकी क्या मांगें मानी हैं। अगर सरकार का नकारात्मक रवैया रहा तो खापों और गांव के प्रतिनिधियों से संपर्क करके पूरे हरियाणा में दोबारा से जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।