भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने रविवार को को अपना वार्षिक लीडरशिप समिट आयोजित किया। इसका विषय, "भविष्य का निर्माणः बदलती दुनिया के लिए प्रमुख नेतृत्व कौशल" रहा।समिट में भारत की उभरती व नवाचारी कंपनियों के नामी संस्थापकों ने भाग लिया। इनमें नेक्सस पावर, गोस्ट्रॉप्स, जीबू, स्ट्रैटव्यू रिसर्च और सैसफ्रास जैसी कंपनियां शामिल रही।
कार्यक्रम में 300 से अधिक छात्र-छात्राएं और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। इन्हें कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों के साथ व्यावसायिक संबंध बनाने का अवसर प्राप्त हुआ। सम्मेलन ने छात्र छात्राओं और संकाय सदस्यों को वर्तमान समय में प्रभावशाली नेतृत्व और नवाचार के महत्व को समझने का एक बेहतरीन मंच प्रदान किया।
आईआईएम निदेशक प्रो. धीरेज शर्मा ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उन्होंने छात्र छात्राओं से आग्रह किया कि वे इन अधिकारियों के जीवन के अनुभवों से सीख लें। उन्होंने नेतृत्व के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "अधिकारियों के लिए सफलता का मतलब केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।" उन्होंने तेजी से बदलती दुनिया में अनुकूलता के महत्व पर जोर दिया और नेतृत्व में समझदारी, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और रणनीतिक सोच की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही प्रतिभागियों से दृढ़ता और उद्देश्य के साथ प्रभावी नेतृत्व करने के लिए तैयार करने वाले गुण अपनाने की अपील की।
निदेशक ने सभी छोटे-बड़े संगठनों में उद्यमी के बढ़ते प्रभाव पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि आईआईएम ने वर्तमान में अपने विविध कार्यक्रमों के तहत 1600 से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया हुआ है। हाल ही में एएमबीए मान्यता प्राप्त की है। इसके साथ ही संस्थान दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत प्रबंध संस्थानों में शामिल हो गया है।
पिछले 3 वर्षों में 75 प्रतिशत से अधिक महिला प्रतिनिधित्व और 30 से अधिक भारतीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आने वाले छात्र छात्राओं के साथ, यह संस्थान विविधता और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है। संस्थान आठ विशिष्ट कार्यक्रम प्रदान करता है। ये विभिन्न शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमियों से आने वाले छात्र-छात्राओं की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।