देश की सीमा की रक्षा में रोहतक का अहम योगदान रहा है। अलग प्रदेश बनने के बाद से अब तक साढ़े पांच दशक में रोहतक से 405 अधिकारी और 20 हजार से ज्यादा जवान सेना में शामिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं अकेले कारगिल की लड़ाई में जिले के नौ जवान व अधिकारी शहीद हुए थे। जबकि 1971 के युद्ध में 30 से ज्यादा ने अपनी शहादत दी थी।
जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के आंकड़े पर नजर डालें तो रोहतक ने देश को 405 अधिकारी दिए हैं। इसमें मेजर से लेकर जनरल रैंक तक के अधिकारी शामिल हैं। यही नहीं, सेना में अहम कड़ी कही जाने वाले जेसीओ (जूनियर कमांडिंग ऑफिसर) 3585 व 15518 विभिन्न रैंकों के जवान दिए हैं। इसमें सामान्य ड्यूटी, क्लर्क, तकनीकी व अन्य पद शामिल हैं। यही नहीं, एक अनुमान के मुताबिक, सैनिक कल्याण बोर्ड में दर्ज इन अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या से करीब पांच गुना अधिक जवान वर्तमान में सेवारत हैं।
जिले के 20000 जवानों के 53000 पारिवारिक सदस्य व आश्रित
सैनिक बोर्ड के आंकड़े के मुताबिक जिले में 20000 जवानों के अलावा इनके परिवार व आश्रित भी हैं। यह संख्या करीब 53000 बनती है। यही नहीं देश के लिए शहीद होने वालों की भी लंबी सूची है। इसमें पाकिस्तान और चीन से हुए युद्ध के अलावा कारगिल युद्ध के शहीद भी शामिल हैं। इन वीरों की 89 वीरांगनाएं जीवित हैं। पूर्व सैनिक, उनकी विधवा व अन्य आश्रित इससे अलग हैं।
जल और वायुसेना में भी बड़ी संख्या में हैं जवान
थल सेना के अलावा जल व वायु सेना में भी बड़ी में संख्या में जिले के जवान तैनात हैं। सैनिक बोर्ड के मुताबिक, जिले से जल सेना में 766 व वायु सेना में 891 जवान हैं।
सेना भर्ती में उमड़ती है हजारों की भीड़
देश सेवा को लेकर जिले के युवाओं के जज्बे का अनुमान उनकी सेना भर्ती में उमड़ती भीड़ से लगाया जा सकता है। सेना भर्ती कार्यालय की ओर से नवंबर में हुई खुली भर्ती में 11 हजार से अधिक युवाओं ने दमखम दिखाया। भर्ती प्रक्रिया की कड़ी परीक्षा पास कर 3000 जवान सेना की लिखित परीक्षा में जगह बनाने में सफल रहे। यह आंकड़ा सराहनीय है। यही स्थिति लगभग हर भर्ती में रहती है।
जिले से देश की सुरक्षा में बड़ी संख्या में जवान रहे हैं। बोर्ड के पास दर्ज पूर्व सैनिकों के रिकॉर्ड के हिसाब से जिला 404 अधिकारी सेना को दे चुका है। इसके अलावा 3585 जेसीओ व 15518 विभिन्न रैंकों के जवान शामिल हैं। जिले से बड़ी संख्या में जवानों का सेना में होना यह गौरवपूर्ण है।
-नरेश चंद, सचिव, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड, रोहतक।