कमांडर इंदर सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र भेंट कर श्रद्धांजलि देते एसडीएम राकेश सैनी।
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गाजी पनडुब्बी डुबोने वाले कमांडर (रियर एडमिरल) इंदर सिंह मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। परिजनों के साथ छह दिन पहले चार अक्तूबर को अपना 99वें जन्मदिन मनाकर वाले इस योद्धा को हरियाणा पुलिस व नेवी के जवानों की टुकड़ी ने सैनिक सम्म्मान के साथ अंतिम विदाई दी। उनकी अंतिम यात्रा में एसडीएम राकेश कुमार, नेवी और सेना के जवानों के अलावा पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर समेत अनेक लोग शामिल हुए।
इससे पूर्व झंग कॉलोनी निवासी कमांडर इंदर सिंह की अंतिम यात्रा योद्धा के जयकारों के साथ नेवी के जवानों की अगुवाई में निकाली गई। यहां पारंपरिक रस्म के बाद नेवी, सेना, एनसीसी के अधिकारियों, परिजनों, पूर्व सैनिकों ने उन्हें पुष्प चक्र भेंट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जवानों ने मातमी धुन बजाकर व हवाई फायर कर वीर चक्र विजेता कमांडर को सलामी दी।
शान से सुनाते थो गाजी पनडुब्बी डुबाेने की कहानी
एडमिरल नसीब सिंह नैन ने बताया कि कमांडर इंदर सिंह की बड़ी बेटी शांति के विवाह के बाद उन्हें भी 1971 युद्ध के वीर से नजदीक से मिलने का अवसर मिला। जब मौका मिलता तो उनसे गाजी पनडुब्बी को डुबोने का किस्सा सुनते। वे भी शान के साथ अपनी बहादुरी की कहानी सुनाते। हमें उन पर गर्व पर है। वे अपने पीछे तीन बेटे, दो बेटियां व पोते-पोति का भरापूरा परिवार छोड़कर गए हैं।
हमें दादा की बहादुरी पर है नाज
मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर शिव प्रकाश ने कहा कि हमें अपने दादा रियर एडमिरल इंदर सिंह और उनकी बहादुरी पर नाज है। उनसे जीवन में काफी कुछ सीखने को मिला। पिता कैप्टन ओमप्रकाश, चाचा कैप्टन वीपी सिंह, छोटे चाचा डॉ. एसपी सिंह, बुआ शांति व बिमला भी उनसे प्रभावित रहे। कैप्टन वीपी सिंह का बेटा अभिषेक यूएसए में साॅफ्टवेयर इंजीनियर है।