स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में रोहतक शहर ने लंबी छलांग लगाई है। 12 माह में रोहतक राष्ट्रीय स्तर पर 1 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों में 69वें से 35वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि प्रदेश में करनाल के बाद दूसरे स्थान पर रहा। शहर में गलियों व सड़क किनारे पड़े बिल्डिंग मैटेरियल प्रबंधन में 50 प्रतिशत से भी कम अंक मिले हैं। साल 2016 से पीएम मोदी की पहल पर राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है।
6 हजार में से मिले 4180 अंक
स्वच्छ सर्वेक्षण कुल 6 हजार अंकों का था। इसमें 1500-1500 अंको के चार भाग शामिल थे। इसमें किसी भी शहर की सफाई की रैंकिंग को निर्धारित किया जाता है। रोहतक शहर को डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में सबसे ज्यादा और सर्टिफिकेशन में सबसे कम अंक मिले हैं।
सिटीजन फीडबैैंक : 1146/1500
इसके तहत जांच टीम द्वारा लोगों से सीधी बातचीत कर व एप के माध्यम से लोगों से 12 सवाल पूछे गए थे। निगम ने अपने स्तर पर सिटीजन फीडबैक को कामयाब बनाने के लिए सामाजिक व दूसरे संगठनों की मदद ली थी। लोगों का भी फीडबैक देने का आह्वान किया था। जो जवाब मिले उनके आधार पर 1500 में से जांच टीम ने 1146 अंक दिए हैं।
सर्टिफिकेशन : 700/1500
जांच टीम शहर में खुले में शौच मुक्त व्यवस्था का सर्वे करती है। साथ ही शहर के शौचालयों में स्वच्छता व सुविधाओं के आधार पर उनकी रैंकिंग निर्धारित की जाती है। इसमें ओडीएफ प्लस प्लस के तहत पता चलता है कि शहर कितना खुले में शौच मुक्त हुआ है। इसी में कूड़ा मुक्त शहर की रैंकिंग तय की जाती है। इसमें रोहतक शहर को 1 स्टार मिला था। क्योंकि रोहतक में अब भी सड़कों किनारे भवन निर्माण सामग्री से लेकर दूसरा कचरा पड़ा रहता है। यहां पर निगम को मात्र 700 अंक मिले हैं, जो 50 प्रतिशत से भी कम हैं।
डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन : 1436/1500
जांच टीम सीधी शहर में आकर जगह-जगह जांच पड़ताल करती है। शहर की सड़कों से लेकर डंपिंग प्वाइंट तक की जांच की जाती है। इसमें 1500 अंकों में से नंबर देना टीम के सर्वे पर ही निर्भर करता है कि किसी शहर में कितनी सफाई हो चुकी है या नहीं हुई है। इसमें रोहतक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1436 अंक हासिल किए हैं। इससे साफ है कि शहर सफाई के मामले में काफी अव्वल है।
एसएलपी : 898/1500
जांच टीम द्वारा इसमें यह पता लगाया जाता है कि शहरवासी स्वच्छता व सफाई को लेकर कितने जागरूक हैं। इसके अलावा कचरा उठान से लेकर नागरिक की सहभागिता की भी जांच की जाती है। उसी के आधार पर एरिया वाइज अंक दिए जाते हैं। इसमें निगम को 898 अंक ही मिले हैं, जो कम है।
रेकिंग भी यूं आया सुधार
2017 295
2018 89
2019 69
2020 35
नोट : प्रदेश में 2018 से अब तक करनाल पहले व रोहतक दूसरे स्थान पर रहा।
स्वच्छता के मामले में रोहतक निगम को राष्ट्रीय स्तर पर 35वां स्थान मिला है, जो गौरव की बात है। डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन के मामले में सबसे ज्यादा अंक मिले है, लेकिन सर्टिफिकेशन में बहुत सुधार की गुंजाइश है। इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
निगम को अच्छी रैंकिंग मिली है, लेकिन शहर सड़कों किनारे पड़ी रहने वाले भवन निर्माण सामग्री के प्रबंधन में ठोस कदम नहीं उठा सके। निगम ने डंपिंग प्वाइंट बनाया था, लेकिन कामयाब नहीं हो सका।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में देशभर में रोहतक की 35वीं और हरियाणा में दूसरी रैंकिंग आना गौरव की बात है। इसका श्रेय रोहतक वासियों को जाता है। जब से केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तभी से स्वच्छता के मुद्दे को पूरी प्राथमिकता से लिया गया है। पहले जहां पूर्व की सरकारों के समय भ्रष्टाचार में प्रतिस्पर्धा रहती थी, वहीं आज भाजपा की सरकार ने जनहित से जुडे़ विषयों पर लोगों को जागरूक करते हुए प्रति स्पर्धाएं शुरू की हैं। आगे रोहतक को टॉप 10 सूची में लाने का प्रयास किया जाएगा।
- मनीष ग्रोवर, पूर्व मंत्री