माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक।
करवाचौथ का पर्व इस बार केवल परंपरा का उत्सव नहीं रहा, बल्कि बदलते समय में रिश्तों की गर्माहट और विश्वास की नई व्याख्या भी बनकर सामने आया। वीरवार को रोहतक जिले में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। सुबह सर्गी से शुरू हुई यह साधना रात तक श्रद्धा, उत्साह और प्रतीक्षा के रंगों में डूबी रही। हालांकि, बारिश के चलते व्रत खोलने के लिए चांद के दर्शन नहीं हो सके, ऐसे में नई तकनीक यानी सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। इस तरह त्योहार पारंपरिक से आधुनिकता का संदेशवाहक बना।
दिन चढ़ने के साथ ही बाजारों में त्योहार की रौनक दिखाई देने लगी। मेहंदी, चूड़ियां, शृंगार सामग्री, साड़ियां और आभूषणों की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ती रही। शाम होते ही घरों, कॉलोनियों और मंदिरों में करवा माता की पूजा-अर्चना हुई। महिलाओं ने समूहों में बैठकर कथा सुनी और पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए। लाल, गुलाबी और महरून रंग के परिधानों में सजी महिलाएं हरियाणवी लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रतीत हो रही थीं।
रात के समय आसमान की ओर उठी निगाहों में उत्सुकता सबसे अधिक थी, लेकिन मौसम ने इस बार परीक्षा ले ली। शाम से शुरू हुई बारिश और घने बादलों ने चांद को ओझल रखा। छतों और बालकनियों में परिवारों के साथ खड़ी महिलाएं बार-बार आसमान निहारती रहीं। कई स्थानों पर चांद की एक झलक पाने के लिए लोग देर रात तक प्रतीक्षा करते रहे।
हालांकि, बादलों के बीच चांद के दर्शन कठिन रहे, लेकिन इससे उत्सव की भावना कम नहीं हुई। कहीं मोबाइल स्क्रीन पर दूसरे शहरों में दिखे चांद की तस्वीरें साझा की गईं तो कहीं परिवारों ने एक-दूसरे के साथ इस इंतजार को भी उत्सव की तरह जिया। अंततः जहां चंद्रमा की झलक मिली, वहां महिलाओं ने छलनी से चांद और फिर पति के दर्शन कर व्रत खोला। इस दौरान पति-पत्नी के बीच स्नेह और समर्पण का भाव विशेष रूप से दिखाई दिया।
करवाचौथ ने एक बार फिर साबित किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच भी परंपराएं केवल रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों की डोर को मजबूत करने वाले सांस्कृतिक उत्सव हैं।
इनसेट-1
जब सोशल मीडिया बना चांद का संदेशवाहक
बारिश और बादलों के कारण रोहतक में देर रात तक चांद के दर्शन नहीं हो सके तो सोशल मीडिया लोगों के लिए सहारा बन गया। व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम स्टोरी और फेसबुक पोस्ट पर दिल्ली, जयपुर, देहरादून और चंडीगढ़ में नजर आए चंद्रमा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जाते रहे। महिलाएं एक-दूसरे को मोबाइल पर लाइव वीडियो दिखाकर चांद की स्थिति पूछती नजर आईं। कई परिवार छतों पर खड़े होकर फोन स्क्रीन के जरिए चंद्रमा की झलक देखते रहे। तकनीक और परंपरा का यह अनोखा संगम इस बार करवाचौथ की सबसे दिलचस्प तस्वीर बनकर उभरा, जहां आसमान बादलों से घिरा था, लेकिन डिजिटल दुनिया में चांद सबके सामने मौजूद था।
साइड स्टोरी-2
जेन-जी का करवाचौथ: प्रेम, पोस्ट और पिक्सेल वाली प्रतीक्षा
करवाचौथ अब केवल विवाहित महिलाओं का पर्व नहीं रह गया है। शहर के रेस्त्रां, कैफे और सोशल मीडिया पर युवा पीढ़ी की भागीदारी भी चर्चा में रही। कई युवतियों ने अपने मंगेतर या पार्टनर के लिए सांकेतिक व्रत रखा, जबकि युवाओं ने भी दिनभर उपवास रखकर साथ निभाने का संदेश दिया। इंस्टाग्राम पर हैशटैग करवाचौथ और हैशटैग मून वेटिंग जैसे ट्रेंड युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे। चांद का इंतजार करते हुए सेल्फी, रील और तस्वीरें साझा की गईं। जेन-जी के लिए यह पर्व परंपरा से जुड़ने का अवसर बना, जहां प्रेम का इजहार केवल शब्दों में नहीं, बल्कि साझा प्रतीक्षा और साथ निभाने के भाव में भी दिखाई दिया।