नौकरी भिवानी में वेतन पीजीआईएमएस से। पीजीआईएमएस के गार्ड घोटाले में 80 लाख की गड़बड़ी सार्वजनिक हो गई है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में इस पर चर्चा हुई है कि इसका ऑडिट होगा। इसमें जो भी राशि आएगी संस्थान निजी कंपनी की जमा एक करोड़ की सिक्योरिटी राशि में से इसे जब्त करेगा और कंपनी को ब्लैक लिस्ट करेगा। फिलहाल इस मामले में दोनों सुरक्षा अधिकारियों को संस्थान ने बर्खास्त कर दिया है और मंगलवार को आदेश की कापियां घर पर पहुंचवा दी हैं।
पीजीआईएमएस में गत शनिवार हुई एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के मिनट्स मंगलवार को जारी हो गए हैं। जारी मिनट्स में लिखा गया है कि दोनों सुरक्षा अधिकारी बुलाने पर भी नहीं आए। इसलिए जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों को बर्खास्त किया जा रहा है। खुलासा हुआ है कि सुरक्षा अधिकारी ने स्वयं माना है कि 80 लाख की गड़बड़ी हुई है, अब इसका ऑडिट होगा। इस घोटाले का खुलासा भी दोनों सुरक्षा अधिकारियों ने किया था और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। लेकिन गाज भी दोनों पर ही गिरी। जबकि दोनों सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि घोटाला उजागर होने के बाद और एफआईआर होने के बाद भी संस्थान ने निजी कंपनी से काम क्यों कराया। निजी कंपनी को पहले ही ब्लैक लिस्ट किया जाना था। इस एजेंडा पर ईसी की एक सदस्य ने आपत्ति जताते हुए डिसेंट नोट जारी किया है।
सीनियर डॉक्टर के लीगल नोटिस का देंगे जवाब
पीजीआईएमएस के एक सीनियर डॉक्टर की ओर से ईसी के 24 सदस्यों को पांच करोड़ की मानहानि के साथ दिए गए लीगल नोटिस के एजेंडे पर तय हुआ है कि जो सरकार के निर्देश मिले उन्होंने वही किया। इस मामले में उन्होंने सीनियर काउंसिल से सलाह ली है, इसमें जांच रिपोर्ट पर सवाल उठे हैं। अब बैठक में तय किया गया कि इस मामले में सरकार ने जांच करवाई और सरकार ही फैसला लेगी। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने वीसी को जांच करने को कहा था तो चीफ विजिलेंस अधिकारी से जांच करवाई गई थी। जांच अधिकारी के अलावा मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी को निलंबित किया गया था। बाद में जांच में जब सीनियर डॉक्टर को दोषी नहीं पाया गया तो उन्हें बहाल कर दिया गया था। इसके बाद डॉक्टर ने लीगल नोटिस दिया है। इसमें जांच अधिकारी ने कहा था कि इस मामले में दो सेशन जज से जांच करवानी चाहिए या यह मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए। ईसी में तय हुआ है कि इस संबंध में कानूनी सलाह, जांच रिपोर्ट व लीगल नोटिस की कापी सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि करना क्या है।