संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, जिसका शीर्षक वैश्विक उन्नयन सांख्यिकीय मॉडलिंग, अनुकूलन तकनीक और डाटा विज्ञान के अंतर्गत शनिवार को देश-विदेश के विद्वानों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों में महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रो. नसीब सिंह गिल ने संकीर्ण बुद्धिमत्ता से सुपरह्यूमन इनसाइट तक की यात्रा व आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस के अवसरों और चुनौतियों पर विचार प्रस्तुत किए।
प्रो. एन बालकृष्ण ने सह संबद्ध त्रुटियों वाले स्टोकेस्टिक अस्थिरता मॉडलों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। प्रो. जीसी टिक्कीवाल सर्वेक्षण आंकड़ों के माध्यम से सूक्ष्म क्षेत्र आकलन के लिए सिक्योर मॉडलिंग पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन के संयोजक प्रो. एससी मलिक ने जानकारी दी कि आज के सत्रों में विशेषज्ञों ने डाटा विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सांख्यिकीय मॉडलिंग और उनके वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए। प्रो. डीएस हुड्डा ने फजी सॉफ्ट सेट सिद्धांत और इसका आयाम घटाने तथा चिकित्सकीय निदान में उपयोग विषय पर प्रस्तुति दी।
प्रो. के. मुरलीधरन ने गॉसियन प्रक्रिया प्रतिगमन पूर्वानुमान शक्ति बढ़ाने के लिए सीखने योग्य कर्नेल फ़ंक्शन ढांचा पर व्याख्यान दिया। प्रो. डेविड डी. हनागल ने किडनी संक्रमण आंकड़ों के विश्लेषण के लिए सह संबद्ध यौगिक ज्यामितीय फ्रेल्टी मॉडल पर शोध प्रस्तुत किया।
डॉ. शालिनी गुप्ता ने अव्यवस्थित अनुक्रमों और फिबोनाची आधारित रूपांतरणों की ओर से सुरक्षित रंगीन छवि एन्क्रिप्शन योजना पर वक्तव्य दिया। प्रो. आरएल. शिंदे ने मुंबई महानगर क्षेत्र में 2021 से 2024 के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स के स्थानिक रुझानों पर महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया। प्रो. मलिक ने बताया कि इन सत्रों में शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर विशेषज्ञों से ज्ञानवर्धक संवाद का लाभ उठाया।