कोरोना संक्रमण के उपचार की रिसर्च में शामिल बीबीवी 152 कोवैक्सीन के ट्रायल में शामिल पीजीआईएमएस रोहतक के पास लगभग 15 वालंटियर आ चुके हैं, लेकिन सात जुलाई को शुरू होने वाला ट्रायल अभी अटका है। यहां संस्थान की एथिकल कमेटी की अप्रूवल मिल चुकी है और लीगल का इंतजार है। इसके बाद ही संस्थान को वैक्सीन मिलेगी और इस रिसर्च पर काम शुरू हो पाएगा।
देशभर में 13 मेडिकल कॉलेजों में बीबीवी 152 कोवैक्सीन की ट्रायल की अनुमति मिली हैं। इसमें से पीजीआईएमएस भी एक है। इसमें वालंटियर्स को कोवैक्सीन की डोज देने के बाद जांचा जाना है कि उसके अंदर एंटी बाडी लेवल बढ़ता है या नहीं। बीबीवी 152 कोवैक्सीन की रिसर्च को लेकर संस्थान पूरे उत्साह में है। पहले इसकी हल्की फिर नार्मल डोज वालंटियर्स को दी जानी है। इसके बाद छह माह तक इस पर अध्ययन किया जाना है। इसका प्रयोग दो चरणों में होना है। यदि प्रयोग सफल रहा तो कोविड महामारी से लड़ने में यह कोवैक्सीन काफी सहायक होगी। पीजीआईएमएस फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि जैसे ही उनके पास लीगल मंजूरी आ जाएगी वह काम शुरू कर देंगे। गौरतलब है कि डॉ. वर्मा को प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर नियुक्त किया गया है। पहले चरण में 375 में इसका ट्रायल होना है, इसमें वालंटियर की आयु 18 से 55 वर्ष रहेगी। इस रिसर्च में प्रदेश के प्रमुख नोडल अधिकारी कोविड डॉ. ध्रुव चौधरी व कम्यूनिटी विभाग के डॉ. रमेश वर्मा उनके को-इंवेस्टिगेटर हैं।
बीसीजी की वैक्सीनेशन पूरी, अब परिणाम का इंतजार
प्रमुख नोडल अधिकारी कोविड पीजीआईएमएस डॉ. चौधरी ने बताया कि बीसीजी वैक्सीनेशन का कार्य उनका पूरा हो चुका है। 175 लोगों पर अब नजर रखी जाएगी कि उन पर कोरोना के संक्रमण काल में क्या असर रहता है। इसमे छह माह तक लोगों पर नजर रखी जाएगी। इस ट्रायल में शामिल लोगों को फॉलोअप पर बुलाया जाएगा और समय-समय पर जांच की जाएगी। गौरतलब है कि बीसीजी इंजेक्शन देश में लगता है, इसलिए इस ट्रायल को करने में अधिक समस्या नहीं आई।
बीबीवी 152 में यह है अड़चन
सूत्रों के अनुसार जब किसी वैक्सीन को मानव पर ट्रायल किया जाता है तो कंपनी की ओर से लीगल इंश्योरेंस होता है। यह तकरीबन दो से ढाई करोड़ का होता है। यदि ट्रायल के दौरान किसी को नुकसान होता है तो उसके उपचार का सारा खर्च इंश्योरेंस को उठाना होता है। बीबीवी 152 का ट्रायल इंसानों में पहली बार होना है। इसके लिए संस्थान को लीगल इंश्योरेंस के मिलने का इंतजार है।