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कोरोना जांच के लिए एंबुलेंस से मरीज का शव उतरवाने पर परिजनों ने जताया विरोध

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हंगामा करते परिजन । अमर उजाला - फोटो : RohtakCity
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पीजीआई में रविवार को परिवार वालों ने उस समय विरोध शुरू कर दिया, जब कोरोना की जांच के लिए उनके मरीज का शव एंबुलेंस से उतरवा लिया गया। इस दौरान परिजनों को कहना था कि उनके मरीज के आंत के ऑपरेशन से पहले कोरोना की रैपिड जांच कराई गई थी। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब मौत के बाद जांच की क्या जरूरत है। शाम तक शव नहीं मिलने पर उनका सब्र का बांध टूट गया और नाराजगी जतानी शुरू कर दी थी।
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मकडौली निवासी राजकुमार को चार-पांच दिन से पेट में दर्द था। परिजन उसे इलाज के लिए पीजीआई लाए थे। यहां डॉक्टरों ने उसकी आंतों का ऑपरेशन कराने की सलाह दी। परिजनों ने दो दिन पहले मरीज को पीजीआई के वार्ड नंबर चार में भर्ती करा दिया। शनिवार को उसका ऑपरेशन कर दिया गया। इससे पहले रैपिड टेस्ट के माध्यम से उसकी कोरोना की जांच की गई। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। रविवार सुबह मरीज ने दम तोड़ दिया। इसके बाद कागजी कार्रवाई करते हुए डॉक्टरों ने परिजनों को शव सौंप दिया। जब परिजन शव लेकर अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में रखकर ले जाने लगे, तभी डॉक्टरों ने शव वापस उतरवा लिया। इसकी वजह मृतक की कोरोना जांच कराना बताया गया। मरीज का दोपहर करीब दो बजे सैंपल भेजा गया। इसके बाद भी शाम तक शव परिजनों को नहीं मिला। इससे आहत परिजनों ने नाराजगी जताते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने परिजनों के शोर मचाने पर पुलिस में केस दर्ज कराने की चेतावनी देकर उन्हें चुप करा दिया।
राजकुमार के बड़े भाई बलवान सिंह ने कहा कि छोटे भाई की मौत के बाद शव नहीं मिला है। सुबह शव को एंबुलेंस से उतरवा लिया गया था। यही नहीं, कई बार आग्रह करने पर दोपहर दो बजे उसका सैंपल भी भिजवाया गया। इसके बाद भी शाम तक शव नहीं मिला। घर पर परिवार व रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोपहर को सैंपल लेने के बाद भी शव मिल जाता तो शाम तक उसका अंतिम संस्कार हो जाता। अब सोमवार को ही शव मिल पाएगा। यही नहीं, डॉक्टरों ने बुजुर्गों से भी अभद्रता की। केस दर्ज कराने की भी धमकी दी। ऑपरेशन से पहले मरीज की कोरोना जांच हो चुकी थी। फिर मौत के बाद जांच क्यों कराई जा रही है।
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वार्ड में स्ट्रेचर पर रखा रहा शव
बलवान सिंह ने कहा कि मरीज ने रविवार की सुबह दम तोड़ा था। इसके बाद से उसका शव वार्ड में ही स्ट्रेचर पर घंटों पड़ा रहा। शव के कारण वहां से गुजरने वालों के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था। सोमवार तक तो शव की हालत और खराब हो जाएगी। अभद्रता करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वार्ड चार में मरीज की मौत का मामला सामने आया है। ऑपरेशन से पहले उसकी रैपिड जांच की गई थी। डॉक्टरों ने किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती है। कोरोना जांच के लिए शव लिया गया है या नहीं, इस बारे में पता कराया जा रहा है।
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-डॉ. पुष्पा दहिया, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई।
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