20जेएनडी05-सफीदों रोड से कांवड़ लेकर गुजरते हुए कांवडिय़े। संवाद
जींद। सावन माह की शिवरात्रि 23 जुलाई बुधवार को है और शिवरात्रि का शिवभक्तों में विशेष महत्व है। शिवभक्त की ओर से हरिद्वार से कावड़ लेकर आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लाकर सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। पूरा दिन कांवड़ियों का शहर से आवागमन रहता है। इस बार सावन शिवरात्रि पर्व पर भद्रावास का दुर्लभ संयोग है जो श्रद्धालुओं को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से कई गुणा अधिक फल की प्राप्ति देगा।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि इस बार सावन शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि, गजकेसरी, नवपंचम जैसे कई राजयोग का निर्माण हो रहा है। सावन शिवरात्रि पर भद्रा का समय सुबह 5:37 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक रहेगा। ऐसे में श्रद्धालु शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सुबह जल्दी उठ कर स्नान आदि करने के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें। मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और पार्वती माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। गंगाजल और शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। भगवान शिव को खीर, फल और हलवे का भोग लगाएं। माता पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें। शिवजी और माता पार्वती के मंत्रों का जप करें। दीपक जलाकर आरती करें। अंत में सभी श्रद्धालुओं में पूजा का प्रसाद वितरित करें।
साथ ही शिव पूजा करते समय शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें। महाभारत कालीन जयंती देवी मंदिर में महा रुद्राभिषेक कार्यक्रम लगातार आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ ही शिवरात्रि के दिन भोले का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए खीर और पकौड़े का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
20जेएनडी05-सफीदों रोड से कांवड़ लेकर गुजरते हुए कांवडिय़े। संवाद