यौन शोषण के मामले में गुरमीत राम रहीम 20 साल का कारावास काट रहा है। उसने 17 मई को मां की बीमारी का हवाला देकर 21 दिन की पैरोल की मांग की थी। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल अधीक्षक ने उसे शुक्रवार को 12 घंटे यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक का पैरोल दिया था। इसके चलते उसे एक डीएसपी व 12 पुलिसकर्मियों के साथ शुक्रवार की सुबह 6:14 बजे गुरुग्राम ले जाया गया, जहां मां और परिवार से मुलाकात के बाद उसे शाम 6:25 बजे सुनारिया जेल लाया गया।
राम रहीम की मां मानेसर स्थित उसके फार्म हाउस में रहती हैं, जहां पर उनका मेदांता अस्पताल से दिल का उपचार चल रहा है। राम रहीम ने 17 मई को जेल अधीक्षक सुनील सांगवान को मां की बीमारी का हवाला देते हुए 21 दिन के पैरोल के लिए अर्जी दी थी। इसके बाद जेल अधीक्षक की ओर से गुरुग्राम के उपायुक्त यश गर्ग और पुलिस आयुक्त केके राव को पत्र लिखकर उक्त पते पर मां के रहने व बीमार होने की रिपोर्ट मांगी गई थी। गुरुग्राम प्रशासन की ओर से रिपोर्ट आने के बाद जेल अधीक्षक ने वीरवार की शाम को पुलिस अधीक्षक रोहतक से पुलिस सुरक्षा के लिए पत्र लिखा था।
पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा के निर्देश पर डीएसपी महम के नेतृत्व में 12 पुलिसकर्मियों को राम रहीम की सुरक्षा में लगाया गया था। उसे तीन गाड़ियों के साथ मानेसर स्थित फार्म हाउस पर ले जाया गया। वहां पर राम रहीम अपनी मां और परिवार वालों से मुलाकात की। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने उसे निर्धारित समय पर सुनारिया जेल वापस लेकर पहुंचा।
दस दिन पहले रोहतक पीजीआई में हुआ था भर्ती
दस दिन पहले राम रहीम को जेल में अचानक घबराहट होने के बाद उसे उपचार के लिए पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया गया था। जहां पर 21 घंटे तक उसके स्वास्थ्य की जांच व दवा होने के बाद ठीक पाए जाने पर दोबारा जेल भेज दिया गया था।
राम रहीम के आने-जाने क ी जानकारी रही गोपनीय
पुलिस महकमे में भी लोगों को राम रहीम के पैरोल पर जाने की जानकारी तक नहीं हो सकी। विभाग की ओर से इसे बेहद गोपनीय रखा गया था। सूत्रों के अनुसार पुलिस अधीक्षक की ओर से वीरवार रात को ही टीम का गठन कर दिया गया था। साथ ही इसमें शामिल पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन तक रख लिए गए थे। इस दौरान सीआईए टीम में शामिल लोगों को काम में लगाया गया था। इनका नेतृत्व डीएसपी महम शमशेर कर रहे थे। राम रहीम के जेल वापस आने की जानकारी प्रदेश के आला अधिकारियों को दे दी गई है।