देशभर में सुर्खियां बटोरने वाला 2013 का करौंथा कांड।
तीन लोगाें की मौत और आगजनी आज भी ताजा है।
कांड के दौरान गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (ब्वॉयज) में आगजनी हुई।
प्रिंसिपल ने बताया कि आग में स्कूल का काफी सामान और जरूरी रिकॉर्ड जल गया।
लेकिन आरटीआई में हुए खुलासे ने स्कूल प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच में परत-दर-परत मामला खुलता गया। अब प्राचार्य चार्जशीट हो गए हैं।
विभाग में उनके एक इंक्रीमेंट को रोकने की भी तैयारी चल रही है। इसकी फाइल शिक्षा विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर ने उच्च अधिकारियों के पास भेज दी है। इंतजार बस आदेशों का है।
प्रिंसिपल: रिकॉर्ड में ये सामान दिखाया राख
प्राचार्य ने शिक्षा विभाग को दिए पत्र में लिखा कि करौंथा कांड के समय हमारे विद्यालय में प्रदेशभर के करीब 6 हजार पुलिस कर्मियों के रहने की व्यवस्था की गई थी। जिनके लिए शिक्षा अधिकारियों के आदेशानुसार चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी लगाए गए। इस दौरान लगी आग में हमारे स्कूल की दो दरी, टाट पट्टी, 10 प्लास्टिक की कुर्सी, ऑफिस चेयर, 2 फर्श मैट, 1 जंगला, 2 चौखट दरवाजा, 10 बैंच, 15 बैंचों के एंगल, 5 पंखे, बिजली की सारी फिटिंग, 1 लकड़ी की अलमारी सब राख हो गए। इस अलमारी में विद्यालय का पुराना रिकॉर्ड भी था। इसके अलावा 1 दीवार को 3 जगह से तोड़ा गया। विद्यालय में लगे 16 पेड़ भी काटे गए। यहीं नहीं, राजकीय प्राथमिक पाठशाला के 3 योगा मैट, 10 टाट पट्टी और 3 प्लास्टिक की चेयर भी राख हो गई।
आरटीआई: स्कूल के मैदान में खड़े सरकारी वाहन जले थे
सर्कुलर रोड निवासी आरटीआई कार्यकर्ता और रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर के. एल. आहूजा ने इस मामले में आरटीआई लगाई थी। आरटीआई के तहत मिले जवाबों से सामने आया कि जिन सरकारी वाहनों में आग लगी थी, वे स्कूल मैदान में जरूर खड़े थे, लेकिन क्लास रूम से काफी दूर थे। आरटीआई से यह सवाल भी उठे कि अगर स्कूल का इतना सारा सामान राख हो गया तो प्राचार्य ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई? वहीं, विभागीय जांच में कुछ शिक्षकों ने भी आग लगने से इंकार किया।
वर्जन
एक इंक्रीमेंट रोके जाने की तैयारी
करौंथा गांव स्थित ब्वॉयज स्कूल के प्राचार्य के खिलाफ दो मामलों को लेकर जांच चल रही है। उन्हें चार्जशीट किया गया है और एक इंक्रीमेंट रोकने की तैयारी चल रही है। अभी लिखित में आदेश जारी नहीं किए गए हैं, क्योंकि इस मामले में कमेटी की ओर से आए फैसले को मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों के पास भेजा गया है।
- सुमन गुप्ता, असिस्टेंट डायरेक्टर, शिक्षा विभाग।
जारी है जांच, नहीं आया कोई फैसला
करौंथा कांड व टूर मामले में अभी जांच चल रही है। कोई फैसला नहीं आया है। मेरी के. एल. आहूजा से कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं है। उनकी पत्नी पुष्पलता 2007 से स्कूल में अंग्रेजी विषय की लेक्चरर हैं। उनके पति किसी न किसी मामले को लेकर आरटीआई लगाते रहते हैं। पूर्व प्राचार्य के खिलाफ भी आरटीआई लगा रखी है। मुझे इस मामले में इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना।
- चेतन्य शर्मा, प्राचार्य, रावमावि करौंथा।
विभागीय कार्रवाई से संतुष्ट नहीं
करौंथा स्कूल के प्राचार्य के खिलाफ विभागीय जांच के बाद एक इंक्रीमेंट को रोके जाने की बात को लेकर मैं संतुष्ट नहीं हूं। मुझे शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत है कि जब कभी इस मामले में सुनवाई होती है तो वे मुझे बुलाते नहीं हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में फैसला सुनाया है कि किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर वह सरकारी कर्मचारी है तो उसे नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए। - के. एल. आहूजा, रिटायर एसोसिएट प्रोफेसर व आरटीआई कार्यकर्ता।