ठंड में रैन बसेरों की कमी खलने लगी है। शहर में मात्र पुराना बस स्टैंड परिसर में दो पोटा केबिनों में रैन बसेरा बनाया गया है, जबकि अन्य कहीं भी नहीं है। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रोडवेज ने दो सिटी बसों को रैन बसेरे में तब्दील करने का निर्णय लिया है। दोनों बसों को रैन बसेरे के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिनका दिसंबर के प्रथम सप्ताह में उद्घाटन होगा।
ठंड की दस्तक के साथ बेघर व असहाय लोगों को रात गुजारने के लिए रैन बसेरों का ही सहारा होता है। लेकिन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व पीजीआईएमएस के पास रैन बसेरा नहीं है। इसी कारण ठंड के दिनों में गरीब व असहाय लोगों को रात खुले आसमान के नीचे अलाव का सहारा लेकर गुजारनी पड़ती है। बस स्टैंड परिसर में यात्रियों को रात के समय परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज ने दो सिटी बसों को रैन बसेरे में बदलने का निर्णय लिया है। दो सिटी बसों के अंदर रैन बसेरा तैयार किया जा रहा है, जो जल्द ही यात्रियों के लिए तैयार हो जाएगा।
महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग तैयार की जा रहीं बसें
रोडवेज की तरफ से दो सिटी बसों को रैन बसेरे के लिए तैयार करवाया जा रहा है। सीटों को हटाकर उन्हें सही किया गया है। बसों के अंदर बिजली, पानी की व्यवस्था की जा रही है। रात गुजारने के लिए यात्रियों की सुविधा अनुसार बिस्तर व कंबल लगाए जाएंगे। महिला व पुरुष के लिए बसों को अलग-अलग तैयार किया जा रहा है। गुलाबी रंग की बस महिलाओं के लिए बनाई गई है। एक बस में 15-18 लोगों के रात गुजारने की व्यवस्था की जा रही है।
डिपो में खड़ी की जाएंगी दोनों बसें
ठंड के दौरान यात्रियों को रात गुजारने में परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज की तरफ से रैन बसेरों में तब्दील करवाई जा रही दोनों बसों को डिपो परिसर में खड़ा किया जाएगा। 30 नवंबर तक दोनों बस तैयार हो जाएंगी। इसके बाद जिला उपायुक्त के निर्देशानुसार बसों का उद्घाटन कर डिपो परिसर में खड़ा किया जाएगा।
रोडवेज की दो बसों को रैन बसेरे में तब्दील करवाया जा रहा है। नवंबर के अंत तक बस तैयार हो जाएंगी। इसके बाद उपायुक्त के निर्देशानुसार दोनों बसों में रैन बसेरों का उद्घाटन करवाकर जनता को समर्पित किए जाएंगे। महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग बसों में रैन बसेरे बनाए गए हैं। -सुरेंद्र सिवाच, कर्मशाला महाप्रबंधक