रोहतक। करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात, सिल पर करत निशान.. यह दोहा जीवन में संघर्ष कर सफल बनने के लिए प्रेरित करता है। यूपीएससी की परीक्षा में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बहुअकबरपुर के राहुल बल्हारा ने।
यूपीएससी परीक्षा के साक्षात्कार में दो बार फेल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारने वाले इस युवा ने दो गुने जोश के साथ परीक्षा की तैयारी की और 494वां रैंक हासिल किया। अमर उजाला से बेटे की सफलता की खुशी साझा करते हुए किसान पिता विजय कुमार ने परिवार में पहला आईएएस बनने की कहानी साझा की।
उन्होंने कहा कि राहुल का सपना आईएएस बनना था। इसके लिए वह स्नातक की पढ़ाई के साथ ही तैयारी करने लगा था। इस बार उसका आखिरी मौका था। उसे अपना सपना व लक्ष्य दोनों पाना था। इसके लिए पहले से दो गुनी ज्यादा मेहनत की। दिल्ली में रह कर कोचिंग ली। वहीं सारा दिन पढ़ाई में ध्यान लगाया। इससे पूर्व वह दो बार साक्षात्कार में रह गया था। इसके बावजूद उसकी लगन या मेहनत में कोई कमी नहीं आई। पहली बार की चूक से सबक लेते हुए उसने कड़ी मेहनत की ओर सफलता हासिल की। परिवार में वह पहला सिविल सर्विस पास करने वाला सदस्य है। बेटे ने यह परीक्षा पास कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया है। वह कबड्डी का शौकीन रहा है। अपना यूपीएससी का लक्ष्य हासिल करने के लिए इस तरह तैयारी में जुटा की यह शौक भी भूल गया।ण्
मां सरोज देवी ने कहा कि बेटे ने सभी का मान बढ़ाया है। यह हमारे लिए गौरवपूर्ण है। रोहित बल्हारा ने कहा कि छोटे भाई राहुल ने शुरू से ही अपना लक्ष्य स्पष्ट रखा। इसे पाने के लिए हर संभव प्रयास किया। अपनी मेहनत से यूपीएससी परीक्षा पास कर परिवार को खुशियों से सराबोर कर दिया है।