रोहतक। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत बोले-बैलों व बछड़ों के लिए प्रसिद्ध हरियाणा नस्ल की गाय को बचाने की जरूरत है। आधुनिक युग में ट्रैक्टर ने बैलों की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। अब कुछ ही किसान हैं जिन्होंने बैलों की जोड़ी को बचाकर रखा है। ऐसे युवा सही गो भक्त व देशभक्त हैं।
वह सोमवार को इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वेटरनरी एजुकेशन एंड रिसर्च बहुअकबरपुर में आयोजित इंटरनेशनल हरियाणा ब्रीड कैटल शो एंड एक्सपो में बोल रहे थे।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मुझे भी नहीं पता था कि हरियाणा नस्ल की गाय इतना दूध दे सकती है। पहली बार इतनी सुंदर, दूध वाली, अच्छी कद काठी की गाय देखने का अवसर मिला है।
कहा, भारतीय नस्ल की गाय की मांग है। इसकी वजह हमारी गाय का गुणकारी दूध है। इसके गोबर से भी खेतों के लिए बेहतर खाद मिलती है। यह प्राकृतिक खेती का सबसे उत्तम साधन है।
ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने सर्जी होलस्टीन फ्रीजियन व हमारी गायों के दूध पर रिसर्च किया। इसमें पाया कि हमारी गायों का दूध उनकी गायों से बेहतर है। इसका ए टू दूध नाम रखा था। अपनी गायों के दूध को उन्होंने प्राथमिकता देते हुए ए वन नाम रखा था।
राज्यपाल ने कहा, रिसर्च में हमारी गायों का दूध स्वास्थ्य के लिए उत्तम पाया गया। यह स्वास्थ्य को मजबूत करता है। बुद्धि क्षमता बढ़ाती है। यह गुणवत्ता होलस्टीन फ्रीजियन जर्सी गाय में नहीं मिली।
इस कार्यक्रम में अपनी गाय व बैलों को लेकर आए किसान अपने पैशन, समर्पण व संघर्ष से इन नस्लों को बचाने का काम कर रहे हैं। ये गाय 18 से 22 किलोग्राम तक दूध दे रही हैं, यह सराहनीय है।
गौरी गाय ने अगले पैर मोड़कर किया राज्यपाल का अभिवादन
चरखी दादरी के डांडमा गांव निवासी गोपालक वीरेंद्र शर्मा की गाय गौरी ने अगले दोनों पैर मोड़कर व सिर झुकाकर राज्यपाल आचार्य देवव्रत का अभिवादन किया। वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वह रोज सुबह अपनी गाय को नमस्ते करते हैं। इसी से गाय ने नमस्ते करने सीखा है। राज्यपाल ने एक गाय का दूध भी दुहा।