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पीजीआईएमएस की फैकल्टी में विरोध शुरू, जल्द होगी सीनियरों की बैठक

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कोरोना संक्रमणकाल में पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की नींद उड़ गई है, क्योंकि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को एक कैडर में लाने की तैयारी है। यह नियम बनने के बाद एक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर को दूसरे मेडिकल कॉलेज में आसानी से तबादला किया जा सकेगा। पीजीआईएमएस की फैकल्टी में इसका विरोध शुरू हो गया है। जल्द ही इस संबंध में सीनियर डॉक्टरों की जरनल बॉडी की बैठक होगी और अगली रणनीति तैयार होगी।
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प्रदेश में पीजीआईएमएस रोहतक, करनाल, खानपुर, मेवात में सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं और इन सभी जगह हजारों की संख्या में डॉक्टर तैनात हैं। अभी तक हर जगह डॉक्टरों की स्थायी भर्ती होती आई है। यदि किसी को एक संस्थान से दूसरे संस्थान भेजा जाता है तो सिर्फ डेपुटेशन पर। लेकिन अब नियम बनाने की तैयारी है कि सभी डॉक्टरों को एक कैडर में लाकर प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में उनका तबादला किया जा सके। संस्थान के डॉक्टरों का कहना है कि सरकार सर्विस रूल नहीं बदल सकती। जिनकी नियुक्ति जिस नियम पर हुई है, उन्हें नहीं बदला जा सकता। यदि कोई निजी हित के लिए ऐसा करता है तो इसका भी जवाब दिया जाएगा। चर्चा है कि यह सब कुछ प्रशासनिक अधिकारी जानबूझ कर अपने निजी हित के लिए करना चाह रहे हैं। पीजीआईएमएस ऑटोनोमस बॉडी है, इसके फैसले बाहर कैसे हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले संस्थान से कुछ प्रशासनिक अधिकारी चंडीगढ़ गए थे और वहां पर इस संबंध में शीर्ष अधिकारियों से चर्चा हुई है। इसके बाद से संस्थान में खलबली मची हुई है।
यह है खेल
मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की स्थायी भर्ती होती है। इसमें रैंक के हिसाब से संस्थान मिलते हैं। प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों में से मेवात में सीनियर फैकल्टी जाने को तैयार नहीं होती। जबकि मेवात से निकलने के लिए सभी प्रयास करते हैं। ऐसे में नई तैयार हो रही रणनीति सभी डॉक्टरों के सपनों को तोड़ सकती है।
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एचओडी रोटेशनशिप पर होता है हंगामा, संस्थान कैसे छोड़ेंगे
हैरानी की बात है कि सभी प्रयास कर सरकार एचओडी की रोटेशनशिप नहीं कर पाई है। इसके लिए हंगामा होता रहता है। क्योंकि पीजीआईएमएस में जो एचओडी है वह सेवानिवृत्ति तक एचओडी ही रहता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो सीनियर अपना एचओडी पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वह संस्थान कैसे छोड़ सकते हैं। वहीं डॉक्टरों का तर्क है कि आज प्रशासनिक अधिकारी प्रदेश के डॉक्टरों को एक कैडर में लाने की सोच रहे हैं, कल देश के डॉक्टरों को एक कैडर में लाने की सोचेंगे। यह संभव नहीं है।
कुछ डॉक्टरों का फोन आया है और वह इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं। लेकिन अभी लिखित में कुछ नहीं है। इस संबंध में हम अपने अधिकारियों से बात करेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो चंडीगढ़ भी बात की जाएगी। यदि नियमों को बेवजह तोड़ा मोड़ा जाएगा तो उसका विरोध भी होगा। सारी जानकारी लेने के बाद जरनल बॉडी की मीटिंग बुलाकर सार्वजनिक रूप से फैसला लिया जाएगा।
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- डॉ. आरबी जैन, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन
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