रोहतक। उम्र के जिस पड़ाव पर बुजुर्ग सहारे की उम्मीद रखते हैं उसमें उनको अकेलेपन व बेदखली का दर्द झेलना पड़ रहा है। संपत्ति और छोटी-छोटी कहासुनी रिश्तों में ऐसी दरार डाल रही है। जिले में सालभर में इस तरह के करीब 1800 केस सामने आए हैं। बच्चे और मां-बाप अब एक-दूसरे को कई परिस्थितियों में बेदखल कर रहे हैं।
जन सेवा संस्थान के संस्थापक महामंडलेश्वर डॉ. परमानंद महाराज ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या संपत्ति को लेकर बच्चों में विवाद है। संपत्ति के नाम पर ही रिश्ते टूट रहे हैं। बुजुर्गों को घर से निकालने की नौबत आ रही है। दूसरा बड़ा कारण जनरेशन गैप है।
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दौर बदलने के साथ सोच, खान-पान और रहन-सहन में अंतर आ गया है। नई पीढ़ी की सोच में कमी और धैर्य की कमी के कारण दुर्व्यवहार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते परिवार में संवाद और सम्मान बहाल करना जरूरी है। संपत्ति से बड़ा रिश्तों की पूंजी है जिसे बचाना होगा।
विदेश में जाकर बस गए बच्चे फोन तक अटेंड नहीं करते
डॉ. परमानंद महाराज ने कहा कि विदेश में जाकर बस गए बच्चे फोन तक अटेंड नहीं करते हैं। न हालचाल लेते हैं और न आर्थिक मदद। बुजुर्ग अकेले बीमार पड़ते हैं और दर-दर भटकते हैं। वहीं, खान-पान और नशे की लत के कारण भी माता-पिता के साथ झगड़े बढ़े हैं। बच्चे अपनी मर्जी से जीना चाहते हैं और बुजुर्ग पुराने संस्कारों के हिसाब से चलाना चाहते हैं। इसी टकराव में रिश्ते टूट रहे हैं।