फोटो-06सीटीके22 18वें चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में आहुति देते हुए।स्रोत पीठ
राेहतक। स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ टिटौली में आयोजित 18वें चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ के 12वें दिन भजन उपदेशकों ने अपने विचार प्रस्तुत कर वैदिक संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला। दक्षिण अफ्रीका से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आई पंडिता विजय लक्ष्मी ने कहा कि हम आज भी आर्य समाज की बदौलत वैदिक संस्कृति से जुड़े हुए हैं। आर्य समाज ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और सामाजिक सुधार की अलख जगाई। यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी वेदप्रकाश ने अपने उद्बोधन में कहा कि अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने से उन्नति संभव है। वहीं भजन उपदेशिका कल्याणी आर्या ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने सदैव महिलाओं के अधिकारों की वकालत की और शिक्षा व समानता का अधिकार दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई। इस मौके पर जगबीर मलिक, किरण मलिक, जितेंद्र आर्य, धर्मपाल दांगी माैजूद रहे। संवाद