रोहतक। निजी बसों में पास मान्य करने को लेकर यात्रियों की शिकायतें कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं। बस स्टैंड पर हर एक घंटे में करीब पांच शिकायत आ रही हैं। शिकायतकर्ता रोडवेज को लिखित और मोखिक शिकायत देकर लौट जाते हैं। इसके बाद अधिकारियों की ओर से कार्रवाई का असर न के बराबर ही होता है। ऐसे में अनेक विद्यार्थी, छात्र, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक परेशान हैं।
स्टेज कैरिज प्राइवेट बस वेलफेयर एसोसिएशन ने बस पास मान्यता को लेकर अपने मामला कोर्ट तक पहुंचा हुआ है। निजी बस संचालकों के राज्य प्रधान धन सिंह का कहना है कि कोई विभाग निजी बसों में होने वाले फ्री सफर की अदायगी नहीं देता है। ऐसे में निजी बस संचालकों को घाटा हो रहा है।
क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अधिकारियों का कहना कि निजी बसों में पास मान्यता को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, कोर्ट के मामले पर भी स्टे चल रहा है। वहीं, रोडवेज अधिकारियों की ओर से यात्रियों की शिकायत को लेकर आरटीए को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। फिलहाल, बस स्टैंड पर निजी बसों में सवार होने से यात्री हिचक रहे हैं। उनका कहना है कि पास मान्यता न करें तो चालक-परिचालक दुर्व्यवहार करते हैं। संवाद
आरटीए सचिव विरेंद्र ढुल से सीधी बात
निजी बसों में यात्रियों के पास मान्य नहीं किए जा रहे हैं ?
जवाब : निजी बस संचालकों का मामला कोर्ट में विचाराधीन हैं।
अब यात्री निजी बसों में रोडवेज के पास से सफर करें या न करें ?
उत्तर : कोर्ट में स्टे होने के बाद निर्णय आने तक संचालकों को सहयोग करना चाहिए।
यात्रियों की लगातार बढ़ रही शिकायतों का क्या समाधान है ?
उत्तर : शिकायतों के लिए कमेटी बनाई गई है जो समाधान कर रही है।
यात्रियों की समस्याओं का स्थायी समाधान क्या है ?
उत्तर : यह मुख्यालय स्तर का मामला है, उम्मीद है कि दो-तीन दिन में निर्णय आए।
भिवानी की ओर से जाना है। दोपहर ढाई बजे निजी बस में सवार हुआ है। परिचालक ने टिकट के लिए कहा तो आधा टिकट बोला। परिचालक ने आधा टिकट देने से मना कर दिया और बस से उतार दिया।
- शिव रत्न, यात्री, 73 वर्षीय।
निजी बस संचालक कॉलेज की ओर से जारी बस पास स्वीकार करने से इन्कार कर रहे हैं। पास मान्य होने के बावजूद दादरी मार्ग पर निजी बसों में संचालकों ने यात्रा करने से मना कर दिया गया है।
- रजनी, छात्रा।
रोडवेज की ओर से जारी किए गए पास से निजी बसों में सफर करें तो संचालक बस से उतरने तक की धमकी देते हैं। बार-बार शिकायत देने के बाद भी कोई हल नहीं निकला है। अनेक विद्यार्थी परेशान हैं।
- संगीता, छात्रा।