ब्लैक फंगस के टीके की कालाबाजारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को यह टीका फ्री में उपलब्ध है। जबकि निजी अस्पतालों में दाखिल मरीजों के लिए अस्पताल प्रबंधन को पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके बाद गठित तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद उन्हें निर्धारित दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। इतना ही नहीं सिविल सर्जन अनिल बिरला की ओर से निजी अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखा गया है कि उनके पास ब्लैक फंगस का कोई मरीज आता है तो इसकी सूचना वह तुरंत स्वास्थ्य विभाग दें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 37 मरीज उपचाराधीन हैं। इसमें से रोहतक जिले के नौ मरीज हैं जोकि पांच पीजीआईएमएस में व चार अन्य निजी अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ब्लैक फंगस के इंजेक्शन के लिए मरीज परेशान न हों, यह उपलब्ध हैं। इसके लिए अस्पताल को पोर्टल पर आवेदन करना होगा। सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि पीजीआईएमएस में 26 मरीज प्रदेश भर से दाखिल हैं। इसमें रोहतक के पांच मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है और वह ठीक हैं। निजी अस्पतालों में आठ काएनोस में, दो पॉजिट्रोन व एक होली हार्ट में ब्लैक फंगस का मरीज है।
पीजीआईएमएस में फरवरी 2021 से अब तक हुई दो मौत
पीजीआईएमएस फरवरी 2021 से अब तक ब्लैक फंगस से दो मौत की पुष्टि कर रहा है। बताया जा रहा है कि जो अन्य मौत हुई हैं उनकी वजह कोरोना व अन्य बीमारी रही हैं। हाल ही में फतेहाबाद की महिला ने दम तोड़ा है और एक मौत पहले हुई थी। कुछ मरीजों की मौत कोरोना से हो रही है, लेकिन उसे ब्लैक फंगस से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार संस्थान में 34 ब्लैक फंगस के मरीज हैं। जोकि ईएनटी, मेडिसिन व डेंटल में भर्ती हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने 26 मरीजों के दाखिल होने की ही पुष्टि की है।
ऑक्सीजन से सूखता है मुंह और बढ़ती है फंगस
कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है और ऑक्सीजन के दौरान मरीज का गला सूखता है। ऐसे में फंगस समस्या बन जाती है। जो मरीज कोरोना से ठीक हो रहे हैं, उन्हें ब्लैक फंगस से घबराने की जरूरत नहीं है। यदि वह बार-बार मुंह धोते हैं व गरारा करते हैं तो इस समस्या से बचा जा सकता है।
डेंटल के पास भी हैं ब्लैक फंगस के मरीज
सूत्रों के अनुसार ब्लैक फंगस के मरीज डेंटल विभाग के पास भी हैं। लेकिन ये रिपोर्टिड नहीं हैं। डेंटल विभाग में ऐसे मरीज सामान्य रूप से आते रहते हैं, इनका उपचार कर दिया जाता है। इन्हें ऑपरेशन या अधिक बड़े उपचार की जरूरत नहीं होती।
बेटे को ब्लैक फंगस होने पर टीके के लिए पूर्व पार्षद परेशान
रोहतक। नगर निगम के एक पूर्व पार्षद बेहद परेशान हैं कि उनके बेटे को ब्लैक फंगस हो गया है। अब उपचार के लिए उनके बेटे को इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन से इंजेक्शन की व्यव्स्था करने की गुहार लगाई है।
पूर्व पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसका 28 वर्षीय बेटा कोरोना संक्रमित हो गया था। उपचार के बाद कोरोना नेगेटिव तो आ गया, लेकिन बाद में ब्लैक फंगस हो गया। उसने तत्काल शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया। डाक्टरों ने ऑपरेशन से ब्लैक फंगस को तो निकाल दिया, लेकिन बताया है कि हर रोज पांच इंजेक्शन लगेंगे। यह प्रक्रिया लगातार 10 दिन तक चलेगी। मार्केट में कहीं पर ब्लैक फंगस के टीक के नहीं मिल रहे हैं। परेशान होकर इंजेक्शन के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ से लेकर दूसरे शहरों में संपर्क कर रहे हैं। प्रशासन से मांग है कि स्थानीय स्तर पर ही ब्लैक फंगस के टीके की व्यवस्था करे।
झज्जर के 56 वर्षीय बुजुर्ग की कोरोना व ब्लैक फंगस से मौत
पीजीआईएमएस में उपचार के लिए झज्जर से आए एक 56 वर्षीय बुजुर्ग को 16 मई को ब्राउट डेड घोषित कर दिया गया। मरीज सांस लेने में समस्या के चलते ट्रामा सेंटर के ट्राएज एरिया में आया था। मरीज पांच दिन से बुखार में था, उसे कोरोना और ब्लैक फंगस दोनों समस्या थी। मरीज को सरकारी अस्पताल से पीजीआईएमएस रेफर किया गया था। संस्थान में मरीज को बचाने का हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ तो उसे ब्राउट डेड घोषित कर दिया गया।