राेहतक। पीजीआई में 17 साल की एक गर्भवती किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो जाने पर उसका पति शव को लावारिस हाल में छोड़कर भाग गया। भर्ती के वक्त किशोरी ने ही युवक को अपना पति बताया था। हैरानी की बात है कि नाबालिग का पति मानकर पीजीआई ने भी युवक को ही उसका शव सौंंप दिया। उसके भाग जाने पर पीजीआई प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को इसकी सूचना भेजी।
नांगलोई निवासी 17 साल की नाबालिग युवती 15 अप्रैल को पीजीआई के स्त्री रोग विभाग में इलाज कराने पहुंची थी। दो दिन तक यहीं भर्ती रखकर इलाज हुआ, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। हालत गंभीर हो जाने पर उसे आईसीयू में रेफर किया गया।
आईसीयू में ही इलाज के छठवें दिन 20 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। पीजीआई ने नाबालिग के शव को कथित पति को सौंप दिया। लेकिन, वह उसे लावारिस छोड़ कर भाग गया। 21 अप्रैल को न्यू ऑपरेशन थिएटर के पास शव मिलने पर पति के फोन पर कई बार कॉल की गई, लेकिन वह बंद मिला।
पीजीआई अधिकारियों के निर्देश पर हरिओम सेवा दल के सदस्यों ने शव को शवगृह में पहुंचाया। नांगलोई पुलिस को भी इसकी सूचना दी। 25 अप्रैल को पोस्टमार्टम कराकर शव को किशोरी के माता-पिता को सौंप दिया गया।
स्त्री रोग विभाग ने बरती लापरवाही
गर्भवती किशोरी के प्रकरण में लापरवाही भी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पीजीआई पहुंची नाबालिग चार माह की गर्भवती थी। उसे गर्भपात भी हुआ। यह गर्भपात पहले ही हो गया था या फिर इलाज के दौरान हुआ, यह जांच का विषय है। सवाल यह भी है कि पीजीआई ने नाबालिग किशोरी के गर्भवती होने और लावारिस शव मिलने की सूचना स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं दी। क्यों शव को बिना पोस्टमार्टम किए ही कथित पति को सौंप दिया। पीजीआई थाना पुलिस का कहना है कि नांगलोई पुलिस 25 अप्रैल को यहां आई थी, तब पोस्टमार्टम हुआ था। इसके पहले उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
गर्भवती किशोरी की मौत हो जाने पर पति के छोड़ भागने के प्रकरण की मुझे जानकारी नहीं है। इसे चेक कराएंगे। - डॉ. एसके सिंघल, निदेशक पीजीआई