भाजपा प्रदेश प्रभारी और प्रदेशाध्यक्ष के सामने जिलों की बैठकों में कार्यकर्ताओं की अफसरों के खिलाफ शिकायतों को भले ही गंभीरता से नहीं लिया गया हो, मंत्री और आईपीएस के बीच विवाद होने पर जरूर अफसरशाही का विश्लेषण शुरू हो गया है।
इस विश्लेषण में उन सभी जिलों को शामिल कर लिया गया है, जहां बैठकों में कार्यकर्ताओं ने अफसरों पर समस्या नहीं सुनने के साथ ही, बात नहीं मानने का आरोप लगाया था। सभी जिलों का फीडबैक लिया जा रहा है और जिस जगह की शिकायत में सच्चाई मिलेगी, वहां अफसरों में फेरबदल किया जा सकता है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने खुद भी यही कहा है कि अफसरों के विश्लेषण के बाद एक्शन भी लिया जाएगा। इस तरह साफ संकेत दिया जा रहा है कि अफसरशाही में बदलाव हो सकता है।
भाजपा के प्रदेश प्रभारी अनिल जैन और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने पिछले कुछ दिनों से सभी जिलों में पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों का दौर चलाया हुआ था। सभी जिलों में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विधायकों ने प्रदेश प्रभारी के सामने अफसरशाही के खिलाफ अपना दुखड़ा रोया था। अब स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज और आईपीएस संगीता कालिया के बीच विवाद होने के बाद पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर अफसरशाही का विश्लेषण शुरू हो गया है।
सरकार अब अफसरशाही को किसी भी तरह से हावी नहीं होने देना चाहती है। यह भी मैसेज दिया जा सकता है कि भाजपा अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अलावा विधायकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी।
प्रदेश प्रभारी और मेरे सामने मीटिंग में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अफसरों के बात नहीं सुनने के साथ ही समस्याओं के निस्तारण नहीं करने की शिकायत की थी, जिन पर विश्लेषण हो रहा है। उनके विश्लेषण के बाद जिस तरह की बात सामने आती है, उसके आधार पर एक्शन भी किया जाएगा। यह सब कुछ सरकार लोगों को बेहतर शासन के लिए कर रही है, जिससे अफसर आम आदमी की समस्या का तुरंत निस्तारण कर सके।
- सुभाष बराला, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा।