पीजीआईएमएस में सात माह पहले पीजी स्टूडेंट डॉ. ओमकार के सुसाइड मामले में पुलिस द्वारा बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला को क्लीनचिट दे रही पुलिस द्वारा जांच रिपोर्ट जेएमआईसी भरत सिंह की अदालत ने खारिज कर दी। साथ ही डीएसपी नारायण चंद्र, सीआईए थ्री प्रभारी ललित कुमार, पीजीआईएमएस थाना प्रभारी कैलाश चंद्र व मामले की प्राथमिक जांच करने वाले एएसआई देवी सिंह को नोटिस देकर पूछा कि क्यों न आपके खिलाफ आईपीसी की धारा 166ए, 167 व 218 के तहत केस दर्ज किया जाए। अदालत ने गृह मंत्रालय, जिला न्यायवादी, पुलिस अधीक्षक को कॉपी भेजी है। गृह मंत्रालय को लिखा है कि निचले स्तर पर जांच का स्तर यह है।
मामले के अनुसार जून 2019 में पीजी छात्र डाक्टर ओमकार का शव हास्टल के अंदर कमरे में फंदे पर लटका मिला था, जिसके बाद मामले को लेकर संस्थान में काफी हंगामा हुआ। हंगामे के बाद पुलिस ने बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस की तरफ से मामले की जांच के बाद अदालत में रिपोर्ट दाखिल की गई कि मामले में आरोपी बनाई गई सीनियर महिला डाक्टर गीता गठवाला के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 10 जनवरी को जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए उसे वापस पुलिस प्रशासन के पास भेज दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि पुलिस ने न तो शव का पंचनामा किया और न ही फोटोग्राफ केस फाइल में लगाए। इसके अलावा घटना के बाद मृतक का भाई व अन्य परिजन आए थे। उनके भी बयान दर्ज नहीं किए गए। इसके अलावा पुलिस ने डाक्टर ओमकार के मोबाइल फोन व लैपटाप के रिकार्ड की जांच नहीं की।
साथ ही मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले डाक्टर ओमकार के साथी डाक्टरों के बयान दर्ज नहीं किए गए। अदालत ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच अधिकारी ने केवल बाल रोग विभाग में डॉ. पूनम दलाल और डॉ. अंजलि की ही स्टेटमेंट ली, जबकि वहां पर 14 अन्य डॉक्टर भी काम करते हैं। इसके अलावा पुलिस ने डॉ. प्रदीप कुमार रेड्डू चाइल्ड साइकोलोजिस्ट का बयान लिया, जोकि विभाग छोड़ कर जा चुके हैं। पुलिस ने डॉ. विजय अहलावत का व्हाट्स एप मैसेज लगा रखा है। इसमें दिखाया गया कि डॉ. ओमकार की मानसिक स्थिति सही नहीं है। यही नहीं पुलिस ने डॉ. ओमकार की काल डिटेल तो निकाली, लेकिन घटना से पहले उसकी किस - किससे बात हुई, बयान दर्ज नहीं हुए। ऐसे में पुलिस की जांच पर सवाल उठने लाजिमी हैं। ऐसे में इस तरह की जांच रिपोर्ट तैयार करने पर अदालत द्वारा डीएसपी नारायण सिंह, सीआईए थ्री इंस्पेक्टर ललित कुमार, पीजीआईएमस थाना प्रभारी कैलाश चंद्र व एएसआई देवी सिंह को कारण बताओ नोटिस दिया जाए। साथ ही पूछा जाए कि क्यों न इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने पर चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कर मुकदमा चलाया जाए। अब मामले में अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
अदालत के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही जिला न्यायवादी से सलाह दी जा रही है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कह सकेंगे।
राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक