22सीटीके18-राजकीय महाविद्यालय जसिया में विश्व जल दिवस पर एनएसएस वालंटियर्स के साथ सुनो नहरों की
रोहतक। जिले के सभी गांव व कस्बों में कम से कम 10 से 15 कुएं व लगभग इतने ही जोहड़ और तालाब होते थे। विकास की दौड़ ने इन सभी प्रमुख जल स्रोतों को बेकार व खत्म कर दिया है। इसलिए नहरों को बचाना पेयजल आपूर्ति के लिए जरूरी है। यह कहना है सुनो नहरों की पुकार मिशन के मुख्य संरक्षक डॉ. जसमेर सिंह व महासचिव मुकेश नैनकवाल का। वह शनिवार को राजकीय महाविद्यालय जसिया में विश्व जल दिवस पर एनएसएस के स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे।
महाविद्यालय में पहुंचने पर प्राचार्य डॉ. सुदेश लाठर, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जोगिंदर सिंह, डॉ. मीनू सिंह व डॉ. राजकुमार सिवाच ने उनका स्वागत किया। सभी स्वयंसेवकों ने जल बचाने का और नहरों, नदियों के जल को किसी भी प्रकार से प्रदूषित न करने का संकल्प लिया।
स्वयंसेवकों को सुबह के सत्र में योग प्राणायाम कराया गया व सायंकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम व खेल प्रतियोगिताएं कराई गई। मिशन के मुख्य संरक्षक ने कहा कि जिले से पिछले दो दशक में लगभग 5000 से ज्यादा कुएं, जोहड़, तालाब खत्म या खराब हो चुके हैं। यह आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है।