बहादुरगढ़। दिव्यांगता को कमजोरी मानने की सोच को बहादुरगढ़ के शिक्षक अमरजीत सिंह ने अपनी मेहनत और हौसले से गलत साबित किया है। मेन बाजार स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में कार्यरत अमरजीत बच्चों को शिक्षा देने के साथ दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
22 जून 1969 को आठ बिस्वा में जन्मे अमरजीत ने बहादुरगढ़ से स्नातक और रोहतक के गौड़ ब्राह्मण कॉलेज से बीएड किया। शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षक बनने का सपना पूरा किया। उनके भाइयों ने भी उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग दिया।
अमरजीत का कहना है कि दिव्यांगता क्षमता निर्धारित नहीं करती। समाज को दिव्यांगों के प्रति दृष्टिकोण बदलकर उन्हें सम्मान और समान अवसर देने चाहिए। उन्होंने गरीब परिवारों से बच्चों को स्कूल भेजने और सरकारी शिक्षा योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
उनका मानना है कि शिक्षा ने उन्हें सम्मान के साथ जीने का आत्मविश्वास दिया। उनका प्रयास है कि कोई बच्चा आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। शिक्षक दिवस पर उनकी जीवन यात्रा दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का संदेश देती है।
-फोटो 82 : अमरजीत सिंह, शिक्षक, जीपीएस मेन बाजार।