रोहतक। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में चल रही डेयरी और उद्योग के संचालकों को 15 दिन का नोटिस जारी कर उनके सीवरेज कनेक्शन काटने की तैयारी में है।
विभाग के चीफ इंजीनियर आईसी जैन ने अधीक्षण अभियंता को इस संबंध में निर्देश दे दिए हैं। इसकी वजह सीवरेज लाइन में मानक से अधिक वेस्ट छोड़ा जाना है। इसके चलते एनजीटी के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। विभाग पर दबाव है कि वह एसटीपी से मानक के अनुसार ही ट्रीट किया हुआ पानी छोड़ें, जबकि हकीकत यह है कि विभाग के एसटीपी क्षमता से कई गुणा अधिक वेस्ट को फिल्टर करने का प्रयास कर रहे हैं, जोकि तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है।
विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता की बात करें तो ये 425 से 450 टीएसएस प्रति लीटर है, लेकिन एसटीपी तक यह 1000 से 1200 टीएसएस तक पहुंच रहा है। सीवरेज शाखा टीम के सैंपल रिपोर्ट पर नजर डालें तो डेयरी और उद्योग के क्षेत्र में यह मानक 60 हजार तक पहुंच रहा है। ऐसे में विभाग के एसटीपी वेस्ट को साफ कर पाने में असक्षम हैं। विभाग एसटीपी से बगैर फिल्टर यदि पानी छोड़ता है तो एनजीटी सख्ती करता है। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग के चीफ इंजीनियर ने शुक्रवार देर सायं तक जिले के 40 एमएलडी, पीजीआईएमएस, महम और कलानौर के एसटीपी का दौरा किया। इसके बाद शीर्ष अधिकारी ने सभी जिला स्तर के अधिकारियों को सख्ती करने के निर्देश जारी किए हैं। चीफ इंजीनियर को विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीवरेज लाइन में गोबर और केमिकल इतनी मात्रा में होता है कि उनके एसटीपी काम ही नहीं कर पाते।
क्या है मानक
- बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) : यह 250 से 300 होती है, एसटीपी की प्रक्रिया से गुजरने के बाद यह 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे हो जाती है।
- सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) : यह 500 ग्राम प्रतिलीटर के हिसाब से होती है, ट्रीटमेंट के बाद यह 100 से कम हो जाता है।
- टीएसएस (टोटल सस्पेंडिड सोलिड) : यह 425 से 450 एमजी प्रति लीटर होती है। ट्रीट के बाद यह 50 से कम होना चाहिए।
- पीएच वैल्यू छह, सात, आठ होना चाहिए।
क्या है एसटीपी का काम
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य डोमेस्टिक वेस्ट को साफ करना होता है। इसी हिसाब से एसटीपी की क्षमता बनाई जाती है, जबकि शहर की डेयरियों और उद्योगों का वेस्ट इन लाइनों में डलने से एसटीपी काम नहीं कर पाते। बगैर ट्रीटमेंट के पानी छोडे़ जाने पर पर्यावरण बोर्ड विभाग पर सवाल उठाता है और नोटिस जारी करता है।
चार्जशीट करने की रही चर्चा
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में शनिवार को चर्चा रही कि विभाग के चीफ इंजीनियर ने एक अधिकारी की खामी मिलने पर सख्ती दिखाते हुए स्थानीय अधिकारी को चार्जशीट जारी करने का कहा है। अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि यदि खामी दूर नहीं होती तो संबंधित अधिकारी पर सख्ती से कार्रवाई की जाए।
सभी सैंपल हुए फेल, कई जगह जाफ करने के 20 मिनट बाद ही जाम हो जाती है सीवर लाइन
विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डिफाल्टरों को तलाशें और नोटिस जारी करें। इसके बाद भी यदि वे नहीं मानते तो उनके कनेक्शन काट दिए जाएं। सीवरेज लाइन से 20 सैंपल कराए गए हैं और सभी फेल हो गए हैं। स्थिति यह है कि कुछ स्थानों पर सीवर लाइन साफ करने के 20 मिनट बाद ही बंद हो जाती है। हमारे पास जो एसटीपी हैं, उनकी क्षमता डोमेस्टिक वेस्ट के लिए है, न कि गोबर और केमिकल को फिल्टर करने के लिए। विभाग के चीफ इंजीनियर आए थे और उन्होंने बैठक ली है और कार्रवाई के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा किसी को चार्जशीट करने जैसा मामला संज्ञान में नहीं है।
- विशाल बंसल, अधीक्षण अभियंता, पब्लिक हेल्थ