संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई में अब मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को भी जीवन रक्षक सीपीआर की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए ओपीडी ब्लॉक में जल्द ही अत्याधुनिक सीपीआर कियोस्क स्थापित किया जाएगा। शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में निदेशक डॉ. एसके सिंघल और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने इसकी जानकारी दी।
कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने इस पहल के लिए डॉ. कुंदन मित्तल को बधाई दी और कहा कि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के निर्देश पर पीजीआई में जन-जागरूकता और जीवन रक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं।
निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के कई मामले आते हैं। कई बार मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण गोल्डन ऑवर निकल जाता है, जिससे जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 8 से 10 हजार लोग आते हैं। यदि इनमें से अधिक लोग सीपीआर सीख लें तो कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों में काफी कमी लाई जा सकती है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि सीपीआर कियोस्क ओपीडी के ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों की नजर उस पर पड़े। यहां एक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती की जाएगी और रोजाना करीब 500 लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सालाना लगभग 1.5 लाख लोग सीपीआर सीख सकेंगे।
क्या है सीपीआर
निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह रुक जाता है और कुछ ही मिनटों में जान जाने का खतरा बढ़ जाता है। सीपीआर में छाती के बीच हिस्से पर प्रति मिनट 100 से 120 बार जोर से दबाव देकर हृदय की पंपिंग को अस्थायी रूप से जारी रखा जाता है, जिससे मरीज को अस्पताल पहुंचने तक जीवन बचाने का समय मिल जाता है।