फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: नई जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन खरीदेगा पीजीआई

Sun, 25 May 2025 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
विज्ञापन
विज्ञापन
रोहतक। कोविड की एक और लहर आने का अंदेशा है। ऐसे में पीजीआई प्रशासन ने बीमारी से लड़ने के लिए पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। इसी के तहत नई जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन खरीदी जाएगी। कोविड काल में अमेरिकी कंपनी से जीनोम सीक्वेंसिंग लैब को दान में मिली मशीन खराब हो चुकी है। यह कोविड के बाद से बंद है। नई मशीन हमारे देश में उपलब्ध होने वाले रिएजेंट के हिसाब से ही खरीदी जाएगी। इससे अमेरिका या उसकी कंपनी पर निर्भरता नहीं रहेगी।
विज्ञापन

कोविड की नई लहर से निपटने के लिए पीजीआई तैयार है। महामारी की नौबत आने पर मरीजों के लिए पर्याप्त बेड, ऑक्सीजन व अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध हैं। वायरस के बदलते रूप को पहचाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग लैब भी है। यहां कोविड जाने के बाद से वायरस की पहचान का काम बंद है।
कोविड काल में लैब ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उस समय लैब में अमेरिका की एक कंपनी से दान में मिली जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन से खूब टेस्टिंग हुई। इसके चलते मशीन के पुर्जे घिस गए। इसमें खासकर कार के फिल्टर सरीखे पुर्जे नए डाले जाने हैं। ये पुर्जे अमेरिका से मंगवाने होंगे। इसमें खर्च अधिक होगा।
विज्ञापन

ऐसे में देश में ही बनी जीनाेम सीक्वेंसिंग जांच की नई मशीन खरीदने की कवायद शुरू हो गई है। इस बार देश में ही उपलब्ध रिएजेंट इस्तेमाल करने वाली मशीन को ही प्राथमिकता दी जाएगी है। इसके लिए टेंडर जारी किया जाना है।
प्रदेश में पहली जीनोम सीक्वेंसिंग लैब एमडीयू में शुरू हुई थी। कोविड काल में सरकार के आग्रह पर यहां कोरोना वायरस के बदलते रूप को पहचानने व महामारी नियंत्रण में यहां के वैज्ञानिकों ने अहम योगदान दिया। बाद में पीजीआई में मशीन उपलब्ध होने पर सरकार ने बजट व वायरस की पहचान का काम उन्हीं की लैब काे सौंप दिया। इसके बाद से एमडीयू में शोध के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है।
-
क्या है जीनोम सीक्वेंसिग
जीनोम सीक्वेंसिग एक तकनीक है। यह किसी भी जीव की जैविक या अनुवांशिक संरचना के बारे में जानकारी देता है। इसमें जीवित जीव यानी बैक्टीरिया, एंजाइम, वायरस, व्यक्ति, जंतु या पेड़ शामिल हैं। इसे कोविड के समय कोरोना के मूल व बदलते स्वरूप को पहचनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। मशीन की इसी खासियत के चलते इसका नाम जीनोम सीक्वेंसिंग पड़ा।

- डॉ. नरसिंह चौहान, प्रमुख शोधकर्ता, नेक्टजेन जीनोम सीक्वेंसिंग लैब, एमडीयू।
-
फिलहाल जीनोम सीक्वेंसिंग जांच की नहीं है जरूरत
कोविड की नई लहर आ रही है। इससे निपटने के लिए हम तैयार हैं। वायरस का रूप पहचानने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की नई मशीन खरीदी जाएगी। इसकी खरीद में देश में ही मशीन के लिए उपलब्ध होने वाले रिएजेंट को महत्व दिया जाएगा। नया स्ट्रेन घातक नहीं है, इसीलिए फिलहाल जीनोम सीक्वेंसिंग जांच की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन

- डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें