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पीजीआई में दो जगह नौकरी करता रहा हाउस सर्जन, अब फंसा

Sun, 20 Dec 2015 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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पीजीआई में एक डॉक्टर बतौर हाउस सर्जन प्रबंधन की आंखों में धूल झोंकता रहा।
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एक साथ दो विभागों में अलग-अलग नाम से ज्वाइनिंग ली और नौकरी करता रहा। जब मामला पकड़ में आया तब तक पीजीआई प्रबंधन को करीब दो लाख रुपये का फटका लग चुका था।

हालांकि पीजीआई प्रबंधन ने अब रिकवरी के आदेश जारी किए हैं। इधर, इस मामले में पीजीआईएमएस थाने में दो डॉक्टरों के खिलाफ 420 का मामला दर्ज कर लिया गया है।
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पीजीआई प्रबंधन ने एमसीआई और मेडिकल काउंसिल ऑफ हरियाणा को भी पत्र लिखकर डॉक्टर का पंजीकरण रद करने की मांग की है।
पीजीआई थाना पुलिस के मुताबिक पीजीआई के डिप्टी सुपरिटेंडेंट की ओर से डॉ. अंकित यादव और डॉ. आशु के खिलाफ 420 का केस दर्ज करवाया गया है। जांच अधिकारी एएसआई राजकुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जल्द ही जांच शुरू की जाएगी।

ऐसे झोंकी धोखे की धूल
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर पीजीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीजीआई में हाउस सर्जन के लिए सेक्टर-11 जींद निवासी डॉ. अंकित यादव और भिवानी के तोशाम निवासी डॉ. आशु का चयन हुआ था। डॉ. अंकित ने ज्वाइन नहीं किया। डॉ. आशु ने 1 जुलाई को न्यूरोलॉजी विभाग में ज्वाइन किया। इसके बाद 5 जुलाई को अंकित यादव के नाम से आईसीयू में भी ज्वाइन कर लिया। अधिकारी ने बताया कि हाजिरी रजिस्टर में भी दोनों जगह-अलग अलग हस्ताक्षर किए जाते थे।

ऐसे सामने आया मामला
अधिकारी ने बताया कि 3 दिसंबर को आईसीयू से डॉ. अंकित को एक एमएलआर के लिए भेजा गया। जब वे वहां गए तो न्यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. ईश्वर सिंह भी वहां किसी काम से आ गए। जब उन्होंने अपने विभाग के डॉ. आशु को वहां देखा तो उनसे कारण पूछा। डॉ. आशु ने बताया कि वे एमएलआर के लिए आए हैं, आईसीयू से भेजा गया है। इसके बाद डॉ. ईश्वर सिंह ने मामले की जानकारी आला अधिकारियों को दी। पीजीआई प्रबंधन ने जांच कराई तो पूरी पोल खुल गई। इसके बाद अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने पीजीआई थाने को मामले की शिकायत दी। इस मामले में डॉ. अंकित और डॉ. आशु के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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मेडिकल काउंसिल को भी भेजा पत्र
सूत्र ने बताया कि पीजीआई प्रबंधन ने इस मामले को सख्ती से लिया है। पुलिस में मामला दर्ज कराने के साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और मेडिकल काउंसिल ऑफ हरियाणा को भी पत्र लिखा है। इसमें पूरा घटनाक्रम बताकर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की सिफारिश की गई है। हालांकि इसका निर्णय काउंसिल अपने स्तर पर लेगी।
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