प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान यहां स्थित पीजीआई में एक बार फिर से डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो गई है।
सोमवार देर रात डॉक्टरों के साथ परिजनों की झड़प और तोड़फोड़ के बाद पीजी डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं।
मंगलवार सुबह से हजारों मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। वहीं इमरजेंसी में उपचार न मिलने के कारण शुगर से पीड़ित एक महिला ने दम तोड़ दिया।
इस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जांच कराने का आश्वासन दे दिया है।
इससे पहले, मंगलवार सुबह पहले डेंटल कॉलेज, फिर सीआर ओपीडी में जा कर डॉक्टरों से हड़ताल में सहयोग की अपील करते हुए पीजी डॉक्टरों ने समर्थन मांगा।
सीनियर डॉक्टरों को छोड़कर सभी ने अपना समर्थन देते हुए काम छोड़ दिया है। डॉक्टरों ने ओपीडी में चल रही प्रयोगशाला में भी काम ठप कर दिया है।
इमरजेंसी सेवा तो पूरी तरह से चरमरा गई है। यहां से मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ा। आपात विभाग में गन्नौर से आई शुगर की मरीज निहाली देवी ने दम तोड़ दिया।
उसके पति रिज्जूराम का कहना है कि उपचार न मिलने के चलते उसकी पत्नी की मौत हुई है। मीडिया के माध्यम से मामला स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दे दिए
पीजीआई निदेशक, हड़ताली डॉक्टरों और सीनियर स्टाफ के बीच मंगलवार देररात तक बैठकों का दौर जारी रहा। सूत्राें का दावा है कि एक तरफ प्रशासन डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने का आश्वासन मांग रहा है। वहीं, दूसरी तरफ विभागाध्यक्षों को हड़ताली डॉक्टरों को अनुपस्थित बता वेतन कटौती का निर्देश जारी कर रहा है। वीसी डॉ. ओ. पी. कालरा का कहना है कि मारपीट के आरोपी के खिलाफ एफआईआर हो गई है। अब हड़ताल का कोई औचित्य नहीं बनता।