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Rohtak News: पीजीआई में हीमोफीलिया पीड़ित का रक्तस्राव रोकने के लिए फैक्टर 8 खत्म

Wed, 24 Sep 2025 02:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। हीमोफीलिया मरीजों को पीजीआई में राहत नहीं मिल रही है। इनके शरीर से रक्तस्राव रोकने के लिए संस्थान में फैक्टर 8 ही नहीं है। इस कारण मरीजों को दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। इधर, संस्थान प्रबंधन का दावा है कि फैक्टर उपलब्ध हैं और मरीजों को दिए जा रहे हैं।
हीमोफीलिया वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान अजय शर्मा ने बताया कि काफी समय से पीजीआई में फैक्टर 8 उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों से संपर्क करने पर केवल आश्वासन मिलता है। मरीज व उनके परिजनों को फैक्टर की डिमांड भेजे जाने की बात कही जा रही है।
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संस्थान में फैक्टर नहीं आने से मरीज परेशान हैं। इनके शरीर से बहता रक्त देखकर भी परिजन कुछ नहीं कर पा रहे हैं। मरीजों को इसके लिए दिल्ली ले जाना पड़ता है। यह एक गंभीर बीमारी है। इसमें मरीज को तुरंत फैक्टर लगने पर खून रुकने से राहत मिलती है। फैक्टर 8 सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, फैक्टर 7 व 9 की भी जरूरत पड़ती रहती है। इनकी पीजीआई में उपलब्धता जरूरी है।


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दिल्ली से मंगाने पड़ रहे फैक्टर
घनीपुरा निवासी प्रवीण ने बताया कि उनका सात वर्षीय पौत्र हीमोफीलिया से पीड़ित है। फैक्टर 8 की जरूरत होती है जो पीजीआई में नहीं है। इस कारण दिल्ली जाना पड़ता है। इस दिक्कत के कारण दिल्ली के नरेला में ही रहना पड़ता है। पीजीआई में यह फैक्टर उपलब्ध हो तो बड़ी राहत मिल जाएगी।
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पीजीआई में हीमोफीलिया मरीजों के लिए फैक्टर आठ उपलब्ध है। आने वाले मरीजों को फैक्टर लग भी रहे हैं। फिर भी कोई कमी है तो इसे दूर किया जाएगा।
- डॉ. एसके सिंघल, पीजीआई निदेशक


यह है हीमोफीलीया
यह एक अनुवांशिक रक्तस्राव विकार है। इसमें रक्त ठीक से नहीं जमता है। इस कारण चोट लगने या सर्जरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होता है। शरीर में जोड़ों, मांसपेशियों व अंगों में भी रक्तस्राव हो सकता है। यह तब होता है, जब रक्त में पर्याप्त क्लॉटिंग कारक (थक्का जमाने वाले प्रोटीन) नहीं होते हैं। इससे रक्त के थक्के बनने में मुश्किल होती है। हीमोफीलिया ए व बी आम हैं। ये फैक्टर 8 व 9 की कमी के कारण होते हैं।
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