पीजीआईडीएस रोहतक में डॉक्टरों की टीम ने किया कारनामा
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हेल्थ यूनिवर्सिटी के पीजीआईडीएस में डॉक्टरों ने वह कारनामा कर दिखाया जो पटना एम्स के डॉक्टर नहीं कर सके। यहां के डॉक्टरों की टीम ने आंख की पाकेट में घुसे करीब 6.5 सेंटीमीटर लंबे लकड़ी के टुकड़े को निकालकर एक किशोर की आंख बचा ली। मरीज इससे पहले बिहार के पटना में एक निजी अस्पताल और पटना स्थित एम्स में उपचार कराने गया था। लेकिन डॉक्टर लकड़ी के टुकडे़ को निकाल पाने में नाकाम रहे थे। डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने अपनी टीम को सफल आपरेशन करने पर बधाई दी है।
मुंह एवं दंत शल्य चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पटना निवासी 16 वर्ष के लड़के को लगभग 7 महीने पहले क्रिकेट खेलते समय दाहिनी आंख की पाकेेट में लकड़ी का टुकड़ा घुस गया था। तब से उसकी आंख में धुंधलापन और दोहरी दृष्टि की शिकायत थी। गनीमत थी कि लकड़ी के टुकड़े ने आंखों को ज्यादा क्षति नहीं पहुंचाई थी। मरीज ने बताया कि चोट लगने के तुरंत बाद उसने पटना में एक निजी अस्पताल में दिखाया। इसके बाद उसे पटना स्थित एम्स में दिखाया गया। यहां डॉक्टरों ने टुकडे़ को निकालने की कोशिश की पर लकड़ी गहरी धंसी होने के कारण कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उसने रोहतक पीजीआई में दिखाया। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि आंख के अंदरूनी भाग में 6.5 सेंटीमीटर लंबा लकड़ी का टुकड़ा है। यह आंख और दिमाग को जोड़ने वाली नस के काफी करीब है। इसके न निकाले जाने पर आंख की रोशनी पूरी तरह जाने का भी खतरा था। डॉक्टरों की टीम ने 28 सितंबर को आपरेशन कर लकड़ी का टुकड़ा मरीज की दाहिनी आंख को बिना नुकसान पहुंचाए निकाल दिया। इस आपरेशन में निश्चेतन विभाग से डॉ. प्रशांत और उनकी टीम, क्षेत्रीय एवं नेत्र संस्थान से डॉ. रीना गुप्ता, दंत सर्जरी से डॉ. अमरीश, डॉ. विकास, डॉ. नेहा, डॉ. नीरज और डॉ. डोली शामिल रहे।