रोहतक। हाड़ कपाऊ ठंड ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। ऊपर से मौसमी बीमारियों ने भी जीना दूभर किया हुआ है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी आम बात है लेकिन ठंड में आम धारणा है कि डिहाइड्रेशन नहीं होती।
जबकि चिकित्सकों का कहना है कि ठंड के मौसम में भी शरीर को उतना ही हाइड्रेट रखना जरूरी होता है जितना कि गर्मियों के मौसम में। क्योंकि शरीर करीब 60 प्रतिशत पानी से बना होता है और यह कई महत्वपूर्ण कामों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है।
-डिहाइड्रेशन के लक्षण
प्यास न लगना
पसीना न निकलना
खुश्क त्वचा
मुंह सूखना
कमजोरी
चक्कर आना
उल्टी
शरीर के तापमान को नियंत्रित करना, पोषक तत्वों को पहुंचाना, कचरे को बाहर निकालना और टिशू व अंगों को हाइड्रेट रखना, ये सभी काम पानी के बिना नहीं हो सकते। पानी का कम सेवन दिल की बीमारी, किडनी में पथरी, यूरीन ट्रैक में संक्रमण, कब्ज और डिहाइड्रेशन के खतरे को बढ़ा सकता है। सर्दियों के दौरान, डिहाइड्रेशन धीरे-धीरे दिल के कामों को प्रभावित कर सकता है और दिल संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
-डॉ. पवन गोयल, फिजिशियन, सामान्य अस्पताल
डिहाइड्रेशन तब हो सकता है जब शरीर अधिक तरल पदार्थ प्राप्त करता है उससे अधिक खो देता है। थकान और मांसपेशियों में ऐंठन, सिर दर्द और जब आप बैठने या लेटने की स्थिति से अचानक खड़े हो जाते हैं तो रक्तचाप में अचानक गिरावट आना, डिहाइड्रेशन के मूल लक्षणों में से एक है। ठंड में भी हर दो घंटे पर कम से कम एक गिलास जल जरूर पीना चाहिए।
डॉ. कुलप्रतिभा, फिजिशियन, सामान्य अस्पताल