रोहतक। एक नवजात शिशु की अहमियत उसकी मां को ही पता होती है, यदि उसे छींक भी आ जाए तो मां परेशान हो जाती है। ऐसे में एक शिशु रोग विशेषज्ञ की अहम जिम्मेदारी होती है, क्योंकि बच्चा अपनी बीमारी के बारे में बता नहीं सकता और चिकित्सक को जांच के आधार पर उसका इलाज करना होता है। हर शिशु रोग विशेषज्ञ को बच्चे के संपूर्ण इलाज की जानकारी होनी चाहिए। यह कहना है पीजीआईएमएस के नियोनेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जगजीत सिंह दलाल का।
वह रविवार को यहां नियोनेटोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कम वर्कशाप नियोनेटल नॉन- इनवेसिव वेंटिलेशन सीएमई में प्रदेश के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समक्ष अपने अनुभव साझा कर रहे थे। डॉ. दलाल ने चिकित्सकों को बताया कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को बहुत कम किया जाए, इसके लिए समय-समय पर चिकित्सकों को ट्रेनिंग प्रदान करवाई जा रही है। इसी कड़ी में यह सीएमई आयोजित की गई है। इसमें दिल्ली, राजस्थान, पंजाब व अन्य राज्यों से शिशु रोग विशेषज्ञ अपना व्याख्यान देने पहुंचे हैं। प्रदेश में अभी शिशु मृत्युदर 1000 पर 19 है, इसके लिए सरकार का प्रयास है कि इसे 2030 तक घटाकर 12 तक लाया जाए। सीएमई के लिए कुलपति डॉ. अनिता सक्सेना ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी विभागों को इस प्रकार की सीएमई व कांफ्रेंस आयोजित करके अपना ज्ञावनर्धन करते रहना चाहिए।
निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि संस्थान में इस प्रकार की कांफ्रेंस अधिक से अधिक आयोजित की जाएं ताकि पीजी व अन्य स्टाफ को सभी अत्याधुनिक तकनीकों से अपडेट रखा जा सके और मरीजों को उच्च गुणवता की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। डीन डॉ. कुलदीप सिंह लालर ने सीएमई के लिए डॉ. जगजीत सिंह दलाल और उनकी टीम को बधाई दी।
ऐसे करें मैनेजमेंट
दलाल ने बताया कि यदि नवजात को सांस लेने में कोई दिक्कत होती है तो उसकी हमें मैनेजमेंट करनी है। कई बार प्रीमैच्योर बच्चों में सांस लेने की समस्या हो जाती है, ऐसे में बच्चे को सांस की नली से बिना ट्यूब डाले यदि हम सीपैप या अन्य माध्यम से ऑक्सीजन प्रदान कर देते हैं तो उससे बच्चे के फेफडों में इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है। वहीं इसके साथ ही बच्चे के दिमाग की ग्रोथ अच्छी होती है और उसे बार-बार निमोनिया होने का जोखिम भी घट जाता है।
इन्होंने भी दिया व्याख्यान
इस दौरान डॉ. रमेश चौधरी, डॉ. संजय वजीर, सूक्ष्म जैन, मनोज रावल, डॉ. शिव साजन, डॉ. आशीष जैन, डॉ अमनप्रीत सेठी, डॉ. कुमार अंकुर, डॉ. एनडी वासवानी आदि ने भी अपने विचार रखें।