कोरोना से जंग जीत चुके मरीज यह सोच कर अपने स्वास्थ्य के प्रति ढिलाई न बरतें कि अब उनको कोई खतरा नहीं है। क्योंकि 20 से 25 फीसदी कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों को लंग फाब्रोसिस होने का खतरा बना रहता है। यदि समय पर इसका उपचार नहीं होता तो यह गंभीर समस्या बन सकता है। मरीज को इस समस्या से बचाने के लिए पीजीआईएमएस का पीसीसीएम विभाग पोस्ट कोरोना डिस्चार्ज केयर क्लीनिक शुरू करने की तैयारी में है। यह समस्या ऑक्सीजन व वेंटिलेटर पर उपचार पाने वाले मरीजों को होने की अधिक संभावना रहती है।
प्रदेश के प्रमुख कोविड-19 के नोडल अधिकारी एवं पीजीआईएमएस पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि कोरोना के 80 फीसदी मरीज बगैर दवा के ठीक हो रहे हैं। लेकिन जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है या वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है, उनको लंब फाइब्रोसिस होने का अधिक खतरा बना रहता है। कोरोना से ठीक हो कर जा चुके मरीजों की बात करें तो इन्हें अब फॉलोअप पर बुलाने की जरूरत है। इससे हम समय रहते किसी भी समस्या के शुरू होने से पहले ही उपचार दे पाएंगे। इन मरीज को लंग फाइब्रोसिस से बचाने के लिए पीसीसीएम विभाग प्रशासन से पोस्ट कोरोना डिस्चार्ज केयर क्लीनिक शुरू करने की अनुमति मांग रहा है। इसमें कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। यह स्क्रीनिंग पोस्ट आईसीयू केयर में रहने वाले मरीजों के लिए अधिक जरूरी है। ऐसे मरीजों को लंबा बुखार, थकावट व फटीक जैसी समस्या होती है। कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी, थकावट, लंग कैंसर, निमोनिया और रेस्पीरेटरी सिस्टम तक फेल होने का डर बना रहता है। गौरतलब है कि अभी पीसीसीएम विभाग की सप्ताह में एक दिन ओपीडी चल रही है, इसके दिनों को बढ़ाने के लिए कुलपति को पत्र लिखा गया है।