रेलवे स्टेशन पर 14 मई को मालगाड़ी पटरी से उतरने का कारण मालगाड़ी का ओवरलोड होना था।
रेलवे अधिकारियाें ने इस मामले में जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियाें को सबमिट कर दी है। 8 जून को दूसरी बार हुए हादसे की जांच अभी जारी है।
इसकी रिपोर्ट आने में अभी वक्त लगेगा। एक माह में एक ही जगह दो बार पटरी पर हादसे होने के बावजूद रेलवे के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं और दोनाें हादसाें के बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
मालगाड़ी में भरे थे सीमेंट के कट्टे, दूसरी बार कोयला था भरा
14 मई को जो मालगाड़ी पटरी से उतरी थी, उसमें सीमेंट के कट्टे भरे हुए थे। डिब्बाें में सीमेंट के कट्टाें को इस तरह से ठूंस कर भरा गया था, कि मालगाड़ी के पटरी से उतरने के बाद जब डिब्बाें को खोला गया तो डिब्बे का गेट खोलते ही कट्टे बाहर आकर गिरे। अधिकारियाें ने हादसे वाले दिन ही ओवरलोडिंग पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके महज 25 दिन बाद ठीक उसी जगह दूसरे हादसे के वक्त मालगाड़ी में कोयला भरा हुआ था। ऐसे में अधिकारी अब अपने जांच की दिशा ओवरलोडिंग की ओर भी ले कर जा सकते हैं।
रेलवे अधिकारियाें ने साधी चुप्पी
एक के बाद एक हादसाें के बाद रेल अधिकारियाें ने चुप्पी साध ली है। बार-बार पूछे जाने पर भी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी हादसाें की जांच के बारे में बताने को तैयार नहीं हैं। अधिकारी एक रटा-रटाया जवाब ही दे रहे हैं कि इस बारे में कोई भी जवाब रेलवे मंडल के दिल्ली स्थित मुख्यालय के अधिकारी ही दे सकेंगे।
कई बार हो रही पटरियों की जांच
इसी के चलते अब रोहतक रेलवे स्टेशन पर पटरियाें की खास देखभाल की जा रही है। सूत्राें से मिली जानकारी के अनुसार रेलवे कर्मचारियाें को दिन में कई कई बार पटरियाें की जांच करने के आदेश भी दिए जा चुके हैं। इस पर रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक और अन्य अधिकारी लगातार नजर रखे हुए हैं।
‘14 मई के हादसे की रिपोर्ट उच्चाधिकारियाें को भेजी जा चुकी है। इसका एक कारण ओवरलोडिंग था। 8 जून के हादसे की जांच जारी है। इससे ज्यादा उच्चाधिकारी ही बता सकते हैं।’
सुभाष, सहायक इंजीनियर, उत्तर रेलवे, रोहतक।